केदारनाथ-बद्रीनाथ में टोकन सिस्टम बरकरार, इस बार बेहतर होंगे इंतजाम..
उत्तराखंड: अगले माह से शुरू होने जा रही उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार भी केदारनाथ धाम और बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए टोकन सिस्टम लागू रहेगा। हालांकि पिछले वर्ष इस व्यवस्था को लेकर सामने आई समस्याओं को देखते हुए इसमें सुधार करने की तैयारी की जा रही है। पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन का मानना है कि लगातार बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को व्यवस्थित ढंग से संभालने के लिए टोकन सिस्टम जरूरी है। इसी उद्देश्य से पिछले साल इस व्यवस्था को लागू किया गया था, ताकि श्रद्धालुओं को लंबी कतारों में खड़े होकर घंटों इंतजार न करना पड़े और उन्हें निर्धारित समय पर दर्शन का अवसर मिल सके।
इस व्यवस्था के तहत यात्रा पंजीकरण कराने के बाद जब श्रद्धालु धाम पहुंचते हैं, तो उन्हें एक टोकन नंबर दिया जाता है। इस टोकन में दर्शन का निर्धारित समय अंकित होता है, जिससे भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। हालांकि, शुरुआत में इस सिस्टम को लेकर कई तरह की दिक्कतें सामने आईं। टोकन मिलने के बावजूद श्रद्धालुओं को लाइन में लगकर इंतजार करना पड़ा, जिससे व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठे। इसी बीच चारधाम तीर्थपुरोहित महापंचायत ने टोकन सिस्टम को अव्यवहारिक बताते हुए इसे समाप्त करने की मांग की है। महापंचायत का कहना है कि यह व्यवस्था श्रद्धालुओं की सुविधा के बजाय कई बार परेशानी का कारण बन रही है और दर्शन प्रक्रिया को जटिल बना रही है।
हालांकि प्रशासन इस व्यवस्था को खत्म करने के पक्ष में नहीं है। पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, देश के कई प्रमुख मंदिरों में पहले से ही टोकन या टाइम-स्लॉट आधारित दर्शन व्यवस्था लागू है, जिससे भीड़ प्रबंधन में मदद मिलती है। इसी मॉडल को ध्यान में रखते हुए केदारनाथ और बद्रीनाथ में भी इसे जारी रखा जा रहा है। प्रशासन का यह भी कहना है कि किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने में शुरुआती दौर में चुनौतियां आना स्वाभाविक है। पिछले साल के अनुभवों से सीख लेते हुए इस बार टोकन सिस्टम को और बेहतर और प्रभावी बनाने की कोशिश की जाएगी, ताकि श्रद्धालुओं को अधिक सुगम और व्यवस्थित तरीके से दर्शन का लाभ मिल सके। चारधाम यात्रा में हर वर्ष रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, ऐसे में व्यवस्थाओं को आधुनिक और सुव्यवस्थित बनाना समय की मांग है। ऐसे में टोकन सिस्टम को पूरी तरह समाप्त करने के बजाय उसे बेहतर बनाकर लागू करना ही प्रशासन की प्राथमिकता नजर आ रही है।