उत्तराखंड

उत्तराखंड में मदरसों की शिक्षा व्यवस्था बदलेगी..

उत्तराखंड में मदरसों की शिक्षा व्यवस्था बदलेगी..

प्राधिकरण ने पाठ्यक्रम तैयार करना शुरू किया..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन के बाद मदरसों में शिक्षा व्यवस्था को व्यवस्थित करने की दिशा में काम तेज हो गया है। प्राधिकरण ने धार्मिक शिक्षा से जुड़े पाठ्यक्रम को तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे प्रदेश के मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए एक स्पष्ट और मानकीकृत शिक्षा ढांचा तैयार किया जा सके। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार प्राधिकरण के अध्यक्ष और सदस्य पदभार ग्रहण करने के बाद सक्रिय रूप से काम में जुट गए हैं। उन्होंने कहा कि होली के बाद प्राधिकरण के प्रतिनिधि राज्यपाल और सीएम से मुलाकात कर अपनी कार्ययोजना पर चर्चा करेंगे। इस बैठक में मदरसों में शिक्षा के ढांचे, पाठ्यक्रम और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर विस्तृत बातचीत होने की संभावना है।

प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य मदरसों में दी जाने वाली धार्मिक शिक्षा को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है। इसके तहत यह तय किया जाएगा कि मदरसों में पढ़ने वाले छात्र किन धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन करेंगे और शिक्षा की गुणवत्ता किस प्रकार सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ छात्रों को अन्य आवश्यक विषयों की पढ़ाई भी व्यवस्थित रूप से कराई जाए। नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के सभी मदरसों को उत्तराखंड बोर्ड से संबद्धता लेना अनिवार्य होगा। इसके लिए प्राधिकरण द्वारा कुछ निर्धारित मानक तय किए जाएंगे। जो मदरसे इन मानकों को पूरा करेंगे, उन्हें ही बोर्ड से संबद्धता प्रदान की जाएगी। इस कदम का उद्देश्य मदरसों की शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।

दरअसल, पिछले कुछ समय में प्रदेश के कई मदरसों को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। राज्य बाल कल्याण परिषद के साथ ही पूर्व में राष्ट्रीय बाल कल्याण परिषद की टीमों ने भी कई मदरसों का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान कुछ संस्थानों में अनियमितताएं और व्यवस्थागत खामियां पाए जाने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए कुछ मदरसों को सील भी किया था। ऐसे में अब राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के माध्यम से मदरसों की शिक्षा व्यवस्था को एक तय ढांचे में लाने की तैयारी की जा रही है। माना जा रहा है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों को बेहतर और व्यवस्थित शिक्षा का लाभ मिल सकेगा, साथ ही निगरानी व्यवस्था भी पहले से अधिक सख्त होगी।

 

 

 

 

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