उत्तराखंड

विवादों में घिरे BKTC CEO पर गिरी गाज, धामी सरकार का बड़ा फैसला..

विवादों में घिरे BKTC CEO पर गिरी गाज, धामी सरकार का बड़ा फैसला..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में आगामी चारधाम यात्रा से पहले सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए तीर्थ प्रबंधन व्यवस्था में अहम बदलाव किया है। बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) विजय थपलियाल को उनके पद से हटा दिया गया है और उन्हें उनके मूल विभाग मंडी में वापस भेज दिया गया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में की गई है जब राज्य में चारधाम यात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और व्यवस्थाओं को लेकर सरकार पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है।

सूत्रों के अनुसार यह निर्णय मंदिर समिति से जुड़े हालिया विवादों के चलते लिया गया है, जिसने प्रशासनिक स्तर पर हलचल पैदा कर दी थी। विशेष रूप से केदारनाथ धाम की “रूप छड़ी” के राज्य से बाहर ले जाए जाने के मुद्दे ने तूल पकड़ लिया था। इस पर धार्मिक परंपराओं और व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठे, जिससे मामला संवेदनशील बन गया। लगातार बढ़ते विवाद के बीच सीईओ विजय थपलियाल आलोचनाओं के केंद्र में आ गए थे। मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने इस मुद्दे को लेकर सरकार स्तर पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद शासन ने पूरे प्रकरण की समीक्षा शुरू की और अंततः सख्त कदम उठाते हुए विजय थपलियाल को पद से हटाने का निर्णय लिया गया। इस संबंध में आदेश धीराज सिंह, सचिव धर्मस्व की ओर से जारी किए गए, जिसमें उन्हें तत्काल प्रभाव से उनके मूल विभाग में भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

यह कार्रवाई केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि चारधाम यात्रा से पहले व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार का विवाद या अव्यवस्था सामने न आए और श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल सके। इधर चारधाम यात्रा की तैयारियों को भी तेज कर दिया गया है। बद्रीनाथ धाम और केदारनाथ सहित सभी धामों में व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है। इसी क्रम में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, अनुशासन और धार्मिक मर्यादा को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। अब मंदिरों के गर्भगृह और उसके आसपास 50 मीटर के दायरे में मोबाइल फोन और कैमरों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

इस प्रस्ताव को मंदिर समिति की बोर्ड बैठक में मंजूरी मिल चुकी है और जल्द ही इसे लागू करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश (एसओपी) जारी किए जाएंगे। समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने संकेत दिए हैं कि इस बार यात्रा को अधिक सुव्यवस्थित और अनुशासित बनाने के लिए सख्त नियम लागू किए जाएंगे।सरकार के इन फैसलों से यह साफ संकेत मिल रहा है कि इस बार चारधाम यात्रा को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। एक ओर जहां प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय की जा रही है, वहीं दूसरी ओर श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था को भी उच्च स्तर पर सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार की चारधाम यात्रा न केवल आस्था का केंद्र होगी, बल्कि बेहतर प्रबंधन और अनुशासन का भी उदाहरण पेश करेगी।

 

 

 

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top