चारधाम यात्रा से पहले श्रद्धालुओं पर असर, बद्री-केदार में महंगी हो सकती हैं विशेष पूजाएं..
उत्तराखंड: आगामी चारधाम यात्रा को लेकर जहां एक ओर राज्यभर में तैयारियां जोरों पर हैं, वहीं दूसरी ओर तीर्थ यात्रियों से जुड़ा एक अहम फैसला सामने आ सकता है। बद्री-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में होने वाली विशेष पूजाओं के शुल्क में बढ़ोतरी की तैयारी कर रही है। बताया जा रहा है कि समिति की प्रस्तावित बोर्ड बैठक में इस विषय पर विस्तृत चर्चा होगी और आवश्यकता पड़ने पर शुल्क संशोधन को मंजूरी दी जा सकती है।
चारधाम यात्रा के दौरान हर वर्ष लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं। विशेष रूप से केदारनाथ धाम और बद्रीनाथ धाम में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। सामान्य दर्शन पूरी तरह निःशुल्क रहते हैं, लेकिन विशेष अनुष्ठान, अभिषेक और धार्मिक पूजाओं के लिए निर्धारित शुल्क लिया जाता है। सूत्रों के अनुसार बीते कई वर्षों से इन विशेष पूजाओं के शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जबकि मंदिरों की व्यवस्थाएं, सुरक्षा, साफ-सफाई, विद्युत, जल व्यवस्था और अन्य संचालन संबंधी खर्चों में लगातार वृद्धि हुई है।
मौजूदा समय में केदारनाथ धाम में रुद्राभिषेक पूजा के लिए पांच श्रद्धालुओं से 7,200 रुपये लिए जाते हैं। अभिषेक पूजा के लिए 9,500 रुपये, लघु रुद्राभिषेक पूजा के लिए 6,100 रुपये तथा षोडशोपचार पूजा के लिए 5,500 रुपये शुल्क निर्धारित है। अष्टोपचार पूजा के लिए पांच श्रद्धालुओं से 950 रुपये लिए जाते हैं, जबकि पूरे दिन की विशेष पूजा के लिए 28,600 रुपये का शुल्क लागू है। इसी प्रकार बद्रीनाथ धाम में महाभिषेक पूजा के लिए प्रति यात्री 4,700 रुपये, अभिषेक पूजा के लिए 4,500 रुपये और पूरे दिन की पूजा के लिए 12,000 रुपये निर्धारित हैं। श्रीमद भागवत पाठ के लिए 51,000 रुपये शुल्क लिया जाता है।
मंदिर समिति का मानना है कि तीर्थ यात्रियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। यात्रा अवधि के दौरान व्यवस्थाओं को सुचारु रखने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता पड़ती है। भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, चिकित्सा सुविधा, सफाई व्यवस्था और तकनीकी प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में खर्च बढ़ा है। ऐसे में विशेष पूजा शुल्क का पुनरीक्षण वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी माना जा रहा है। हालांकि अभी तक नई दरों को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन संकेत साफ हैं कि आगामी बोर्ड बैठक में इस मुद्दे पर ठोस निर्णय लिया जा सकता है। यदि प्रस्ताव पारित होता है तो नई दरें आगामी चारधाम यात्रा सत्र से लागू की जा सकती हैं।
चारधाम यात्रा राज्य की आस्था और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। हर वर्ष यात्रा से स्थानीय कारोबार, होटल उद्योग, परिवहन और छोटे व्यापारियों को भी बड़ा लाभ मिलता है। ऐसे में मंदिर समिति यह सुनिश्चित करना चाहती है कि बढ़ती श्रद्धालु संख्या के अनुरूप व्यवस्थाएं और सुविधाएं बेहतर हों। अब सभी की निगाहें बीकेटीसी की बोर्ड बैठक पर टिकी हैं। निर्णय चाहे जो भी हो, यह तय है कि आने वाली चारधाम यात्रा पहले से अधिक व्यवस्थित और व्यापक तैयारियों के साथ आयोजित की जाएगी।