गौचर से बद्रीनाथ तक शटल सेवा का ऐलान, यात्रा होगी आसान..
उत्तराखंड: उत्तराखंड सरकार चारधाम यात्रा को अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और यात्री-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने गैरसैंण में आयोजित विधानसभा सत्र के दौरान बजट अभिभाषण में घोषणा की कि गौचर से बद्रीनाथ धाम तक शटल सेवा शुरू की जाएगी। यह व्यवस्था केदारनाथ मार्ग पर सफलतापूर्वक संचालित सोनप्रयाग-गौरीकुंड शटल सेवा की तर्ज पर लागू की जाएगी। सरकार का मानना है कि नई प्रणाली से श्रद्धालुओं को लंबी कतारों, जाम और अव्यवस्थित यातायात से बड़ी राहत मिलेगी। चारधाम यात्रा के दौरान बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों का दबाव अक्सर चरम पर पहुंच जाता है। विशेष रूप से जोशीमठ से बद्रीनाथ धाम के बीच लंबा ट्रैफिक जाम आम समस्या बन जाती है, जिससे यात्रियों को कई-कई घंटों तक मार्ग में फंसे रहना पड़ता है। पर्वतीय सड़कों की सीमित क्षमता और तीर्थयात्रियों की भारी संख्या के कारण स्थिति और जटिल हो जाती है।
नई योजना के तहत श्रद्धालुओं के निजी वाहनों को गौचर में विकसित की जाने वाली बड़ी पार्किंग में रोका जाएगा। वहां से सरकार द्वारा संचालित शटल वाहनों के माध्यम से यात्रियों को सीधे बद्रीनाथ धाम तक पहुंचाया जाएगा। इस प्रणाली से मार्ग पर वाहनों की संख्या नियंत्रित रहेगी, ट्रैफिक का दबाव घटेगा और यात्रा अधिक सुचारु रूप से संचालित हो सकेगी। गौचर को इस योजना के तहत प्रमुख ट्रांजिट हब के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां श्रद्धालुओं के लिए कम से कम 1000 वाहनों की पार्किंग सुविधा तैयार की जाएगी। पार्किंग के बाद यात्री शटल सेवा के जरिए बद्रीनाथ धाम की यात्रा पूरी करेंगे। प्रति यात्री लगभग 50 रुपये किराया निर्धारित करने का प्रस्ताव है, जिससे सेवा किफायती भी रहेगी।
सरकार का एक प्रमुख उद्देश्य इस योजना के माध्यम से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना भी है। केदारनाथ मार्ग पर संचालित शटल सेवा के अनुभव के आधार पर यहां भी स्थानीय वाहन मालिकों और चालकों को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है। जहां केदारनाथ मार्ग पर शटल सेवा केवल लगभग 5.5 किलोमीटर के दायरे में संचालित होती है, वहीं गौचर से बद्रीनाथ धाम तक प्रस्तावित शटल सेवा करीब 140 किलोमीटर लंबा सफर तय करेगी। अधिकारियों का कहना है कि केदारनाथ में मिली सफलता ने इस मॉडल को अन्य धामों में लागू करने का रास्ता साफ किया है। लंबी दूरी के बावजूद बेहतर प्रबंधन, चरणबद्ध संचालन और यात्री नियंत्रण से इस व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाएगा।
केदारनाथ धाम मार्ग पर पूर्व में संचालित सोनप्रयाग-गौरीकुंड शटल सेवा को व्यापक सफलता मिली थी। लाखों श्रद्धालुओं ने इस सुविधा का लाभ उठाया, जिससे पैदल मार्ग और सड़क यातायात दोनों में संतुलन बना रहा। सैकड़ों शटल वाहनों ने हजारों फेरे लगाकर यात्रियों को सुरक्षित तरीके से गंतव्य तक पहुंचाया। महिलाओं और बुजुर्ग यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष पिंक शटल सेवाएं भी चलाई गई थीं, जिन्हें सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।चारधाम यात्रा में हर वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हालिया आंकड़ों के अनुसार एक यात्रा सीजन में केदारनाथ में 17,68,795, बद्रीनाथ में 16,60,224, गंगोत्री में 7,58,249 और यमुनोत्री में 6,44,637 श्रद्धालु पहुंचे। कुल मिलाकर 48,31,905 तीर्थयात्रियों ने चारधाम के दर्शन किए। यात्रियों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार बुनियादी ढांचे, ट्रैफिक प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्थाओं को आधुनिक बनाने पर जोर दे रही है। नई शटल सेवा को इसी व्यापक रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले यात्रा सीजन में यह व्यवस्था श्रद्धालुओं को अधिक सुरक्षित, आरामदायक और सुव्यवस्थित यात्रा अनुभव प्रदान करेगी।