उत्तराखंड

उत्तराखंड में PMGSY-IV की रफ्तार तेज, पहले चरण में 184 सड़कों का काम शुरू..

उत्तराखंड में PMGSY-IV की रफ्तार तेज, पहले चरण में 184 सड़कों का काम शुरू..

अगले चरण के लिए 203 सड़कों की DPR 1000 करोड़ की तैयार..

 

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में वर्षों से अधूरी और लंबित पड़ी ग्रामीण सड़कों को लेकर अब बड़ी राहत मिलने जा रही है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत राज्य में लंबे समय से अटकी सड़कों के निर्माण की प्रक्रिया को गति देने के साथ-साथ योजना के अगले चरण की तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। इससे दूरस्थ और पहाड़ी इलाकों के सैकड़ों गांवों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (चरण-चार) के अंतर्गत पहले चरण में उत्तराखंड की बड़ी संख्या में सड़कों को केंद्र सरकार से मंजूरी मिल चुकी है। हाल ही में केंद्रीय स्तर पर स्वीकृत इस प्रस्ताव के तहत राज्य में 184 ग्रामीण सड़कों के निर्माण का रास्ता साफ हुआ है।

इन सड़कों पर लगभग 1700 करोड़ रुपये की लागत से काम किया जाना प्रस्तावित है। राज्य सरकार अब इन परियोजनाओं पर तेजी से कार्य शुरू करने की तैयारी में जुट गई है। ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार स्वीकृत 184 सड़कों की कुल लंबाई करीब 1228 किलोमीटर है। इन सड़कों के निर्माण से पहाड़ों और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों की वर्षों पुरानी समस्या दूर होगी। सड़क संपर्क मजबूत होने से न केवल आवागमन आसान होगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं तक पहुंच भी बेहतर हो सकेगी।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अगले चरण की तैयारियों को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। दूसरे चरण के तहत राज्य में 203 नई सड़कों को चिन्हित किया गया है, जिनके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली गई है। इन सड़कों के निर्माण पर करीब 1033 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। विभागीय स्तर पर इस चरण के लिए प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि केंद्र से स्वीकृति मिलते ही दूसरे चरण की सड़कों पर भी कार्य शुरू किया जाएगा।

सरकार का प्रयास है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क को मजबूत कर गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ा जाए, जिससे विकास की रफ्तार को और तेज किया जा सके। कुल मिलाकर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत स्वीकृत और प्रस्तावित परियोजनाएं उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में बुनियादी ढांचे को मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही हैं। आने वाले समय में इन सड़कों के निर्माण से राज्य के सैकड़ों गांवों की तस्वीर बदलने की उम्मीद जताई जा रही है।

हाल ही में केंद्र सरकार से स्वीकृत 184 सड़कों के निर्माण का मुख्य उद्देश्य उन गांवों तक सड़क पहुंचाना है, जहां की आबादी 250 से अधिक है और जो अब तक सड़क सुविधा से वंचित रहे हैं। ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार विभाग की प्राथमिकता स्पष्ट है कि ऐसी बसावटों को मुख्यधारा से जोड़ा जाए, जो अभी तक पक्की सड़क के अभाव में विकास से कटे हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन परियोजनाओं के जरिए न केवल नए इलाकों तक सड़क बनाई जाएगी, बल्कि उन गांवों में भी सड़कें सुधारी जाएंगी, जहां अभी कच्चे या जर्जर मार्ग मौजूद हैं। ऐसी सड़कों को आधुनिक मानकों के अनुरूप अपग्रेड कर बेहतर गुणवत्ता की सड़कें तैयार की जाएंगी।

विभाग ने यह भी साफ किया है कि केंद्र द्वारा स्वीकृत सभी 184 सड़कों पर टेंडर प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी, ताकि निर्माण कार्य में किसी तरह की देरी न हो। सरकार का लक्ष्य है कि इन सड़कों का निर्माण तेज गति से पूरा किया जाए, जिससे ग्रामीण जनता को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके। इस बीच प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के मानकों को लेकर सामने आई एक बड़ी चुनौती पर भी विभाग ने स्थिति स्पष्ट की है। जनसंख्या मानक के चलते उत्तराखंड के करीब 6000 गांव इस योजना के दायरे से बाहर हो गए थे, क्योंकि इन गांवों की आबादी 250 से कम है। नतीजतन बड़ी संख्या में ग्रामीण इलाकों तक सड़क कनेक्टिविटी नहीं पहुंच पाई थी। इस समस्या के समाधान के लिए विभाग ने नया रास्ता अपनाया है। ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार छोटे-छोटे गांवों को समूह के रूप में जोड़कर सड़क सुविधा देने के लिए क्लस्टर आधारित मॉडल पर काम किया जा रहा है।

इस मॉडल के तहत पास-पास स्थित कम आबादी वाले गांवों को एक साथ जोड़ते हुए सड़क परियोजनाएं तैयार की जाएंगी, ताकि अधिक से अधिक बसावटों को सड़क नेटवर्क से जोड़ा जा सके। इस पर सचिव ग्रामीण विकास धीराज गर्ब्याल ने कहा कि इस क्लस्टर बेस्ड समाधान से पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विकास को गति मिलेगी और लंबे समय से सड़क सुविधा से वंचित रहे गांवों तक भी पक्की सड़क पहुंच सकेगी। आने वाले समय में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण उत्तराखंड की तस्वीर बदलने की उम्मीद जताई जा रही है।

जिन गांवों की आबादी 250 से कम होने के कारण उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा था, उनके लिए ग्रामीण विकास विभाग ने क्लस्टर आधारित समाधान तैयार किया है। ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार कम आबादी वाली छोटी-छोटी बसावटों को समूह के रूप में जोड़कर इन्हें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत शामिल किया जाएगा। इस क्लस्टर मॉडल के जरिए कई गांवों की संयुक्त आबादी को योजना के मानकों के अनुरूप लाया जाएगा, जिससे इन इलाकों में भी सड़क निर्माण का रास्ता साफ हो सके। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस दिशा में लगातार अभ्यास किया जा रहा है और विस्तृत योजना तैयार की जा रही है। लक्ष्य यह है कि पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों में मौजूद ऐसी बसावटें, जो अब तक सड़क संपर्क से वंचित हैं, उन्हें चरणबद्ध तरीके से मुख्य मार्गों से जोड़ा जा सके।

ग्रामीण विकास विभाग ने यह भी जानकारी दी है कि राज्य में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के विभिन्न चरणों के माध्यम से पहले ही हजारों बसावटों तक सड़क संपर्क पहुंचाया जा चुका है। पहले चरण के तहत भारी निवेश के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों को सड़क नेटवर्क से जोड़ा गया। आंकड़ों के अनुसार प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के पहले चरण में करीब 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से 1860 से अधिक बसावटों को सड़क सुविधा से जोड़ा गया। इस दौरान लगभग 19,358 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण किया गया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन को नई मजबूती मिली। दूसरे चरण में योजना का फोकस नई सड़कों के बजाय मौजूदा मार्गों के उच्चीकरण पर रहा।

इस चरण के अंतर्गत 112 योजनाओं को स्वीकृति दी गई, जिनमें अधिकतर सड़कों को बेहतर गुणवत्ता में अपग्रेड किया गया। वहीं तीसरे चरण में भी सड़क उच्चीकरण को प्राथमिकता दी गई और 212 सड़कों का सुधार एवं उन्नयन किया गया। ग्रामीण विकास विभाग का मानना है कि क्लस्टर आधारित इस नई रणनीति से अब वे गांव भी सड़क सुविधा से जुड़ सकेंगे, जो अब तक योजना के मानकों से बाहर होने के कारण पीछे रह गए थे। इससे न केवल आवागमन आसान होगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों तक ग्रामीणों की पहुंच भी मजबूत होगी।

 

 

 

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