उत्तराखंड

बद्री-केदार के बाद गंगोत्री धाम में भी सख्ती, गैर-हिंदू प्रवेश पर प्रतिबंध..

बद्री-केदार के बाद गंगोत्री धाम में भी सख्ती, गैर-हिंदू प्रवेश पर प्रतिबंध..

 

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में आगामी चारधाम यात्रा से पहले गंगोत्री धाम मंदिर समिति ने एक अहम निर्णय लिया है। समिति ने गंगोत्री धाम और गंगा मंदिर परिसर में गैर-हिंदू समुदाय के लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। यह नियम अप्रैल माह से शुरू होने वाली चारधाम यात्रा के साथ ही लागू कर दिया जाएगा। मंदिर समिति के पदाधिकारियों के अनुसार इस निर्णय के तहत सिख और बौद्ध धर्म के अनुयायियों को मंदिर में दर्शन की अनुमति दी जाएगी, जबकि मुस्लिम और ईसाई समुदाय के लोगों के लिए मंदिर और धाम क्षेत्र में प्रवेश पूरी तरह वर्जित रहेगा। गंगोत्री धाम मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने कहा कि धाम के तीर्थ पुरोहित लंबे समय से इस विषय को लेकर अपनी मांग रख रहे थे।

उनका कहना था कि कुछ गैर-हिंदू समुदायों द्वारा सनातन धर्म की मर्यादाओं और परंपराओं का सम्मान नहीं किया जाता, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। हाल ही में इस मुद्दे को लेकर एक मुहिम शुरू हुई, जिसके बाद मंदिर समिति ने बैठक कर इस पर गंभीरता से विचार किया और सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया। बताया जा रहा है कि बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति द्वारा पहले ही अपने अधीन मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर सख्त रुख अपनाया जा चुका है। उसी क्रम में अब गंगोत्री धाम मंदिर समिति ने भी अपनी नीति स्पष्ट कर दी है। समिति का मानना है कि चारधाम यात्रा केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय है, ऐसे में धाम की पवित्रता और सनातन परंपराओं की रक्षा करना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।

अप्रैल से सख्ती से लागू होगा नियम..

मंदिर समिति ने साफ किया है कि अप्रैल से शुरू होने वाली चारधाम यात्रा के दौरान गंगोत्री धाम क्षेत्र में यह नियम पूरी तरह लागू रहेगा। इसके तहत किसी भी गैर-हिंदू व्यक्ति को धाम और मंदिर परिसर के आसपास प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि सिख और बौद्ध धर्म के अनुयायियों को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है। समिति का कहना है कि इन धर्मों का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से सनातन परंपरा से गहरा संबंध रहा है, इसलिए उन्हें दर्शन की अनुमति दी जाती रहेगी। सुरेश सेमवाल ने कहा कि जो लोग सनातन धर्म, उसकी परंपराओं और आस्थाओं का सम्मान नहीं कर सकते, उन्हें मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती। समिति का उद्देश्य किसी समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि धाम की धार्मिक गरिमा और शुद्धता को बनाए रखना है। अब इस फैसले के बाद चारधाम यात्रा से पहले प्रशासन और मंदिर समिति के स्तर पर नियमों के पालन को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

 

 

 

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