उत्तराखंड

उत्तराखंड को मिलेगी नई आवास नीति..

उत्तराखंड को मिलेगी नई आवास नीति..

प्रमुख शहरों व धामों की कैरिंग कैपेसिटी पर होगा अध्ययन..

 

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में शहरी विकास और आवास व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। जल्द ही उत्तराखंड में नई आवास नीति लागू की जाएगी, वहीं राज्य के प्रमुख शहरों और धार्मिक स्थलों की धारण क्षमता (कैरीइंग कैपेसिटी) का भी निर्धारण किया जाएगा। इसका उद्देश्य अनियंत्रित निर्माण पर रोक लगाना और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाबद्ध विकास सुनिश्चित करना है। यह जानकारी सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने एक समीक्षा बैठक के दौरान दी। बैठक में उन्होंने उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण तथा प्रदेश के विभिन्न जिलास्तरीय विकास प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली और प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। अधिकारियों से मौजूदा योजनाओं, निर्माण कार्यों और स्वीकृत परियोजनाओं की स्थिति पर विस्तृत जानकारी ली गई। बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 और 2.0 की प्रगति भी प्रमुख एजेंडा रही।

योजना के अंतर्गत चल रहे निर्माण कार्यों, स्वीकृत आवासों और आवंटन प्रक्रिया की गहन समीक्षा करते हुए सचिव आवास ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण किया जाए। डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती आबादी को देखते हुए जरूरतमंद और पात्र लोगों को समय पर आवास उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने और प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश भी दिए। इसके साथ ही प्रमुख शहरों और धार्मिक स्थलों की वहन क्षमता तय करने की प्रक्रिया से पर्यटन दबाव, पर्यावरण संतुलन और आधारभूत सुविधाओं पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा। इससे आने वाले समय में शहरी और धार्मिक क्षेत्रों का विकास अधिक व्यवस्थित और टिकाऊ ढंग से किया जा सकेगा।

एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान सचिव आवास ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रस्तावित नई नीति को वर्तमान शहरीकरण की चुनौतियों के अनुरूप तैयार किया जाए। क्योंकि वर्ष 2017 में जारी आवास नीति की वैधता अवधि समाप्त हो चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नीति में किफायती आवास, तेजी से बढ़ते शहरी विस्तार, पर्वतीय क्षेत्रों की विशेष भौगोलिक परिस्थितियां, तथा पर्यावरण संतुलन के साथ सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में आवासीय योजनाओं को केवल मैदानी क्षेत्रों के दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता।

यहां भूस्खलन, सीमित भूमि उपलब्धता, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और बुनियादी ढांचे की सीमाएं आवास नीति को और अधिक व्यावहारिक एवं संतुलित बनाने की मांग करती हैं। बैठक में मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) और हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) की विभिन्न परियोजनाओं की भी विस्तार से समीक्षा की गई। सचिव आवास ने एचआरडीए को निर्देश दिए कि लंबित विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण किया जाए, ताकि आम जनता को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि विकास प्राधिकरणों को परियोजनाओं के क्रियान्वयन में समन्वय, पारदर्शिता और समयबद्धता बनाए रखनी होगी। किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी को गंभीरता से लिया जाएगा।

कैरिंग कैपेसिटी असेसमेंट स्टडी के लिए तैयार ड्राफ्ट पर भी चर्चा..

एक समीक्षा बैठक के दौरान सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने एनपीएमसी के अंतर्गत संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 से जुड़े सभी कार्यों को निर्धारित समय-सीमा सितम्बर 2026 तक हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में योजना के अंतर्गत चल रहे निर्माण कार्यों, लाभार्थियों के चयन, स्वीकृत आवासों और आवंटन प्रक्रिया की विस्तार से समीक्षा की गई। सचिव आवास ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आवंटन सहित सभी आवश्यक औपचारिकताएं 15 दिनों के भीतर पूरी की जाएं, इसके लिए संबंधित विभागों को तत्काल औपचारिक पत्र जारी किए जाएं, ताकि प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो। इसके साथ ही बैठक में कैरिंग कैपेसिटी असेसमेंट स्टडी के लिए तैयार किए गए ड्राफ्ट पर भी विस्तृत चर्चा की गई। सचिव आवास ने इस अध्ययन को राज्य के प्रमुख नगरों, तीर्थस्थलों, विशेष रूप से चारधाम क्षेत्रों और अन्य पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि बढ़ते शहरीकरण और पर्यटन दबाव को देखते हुए कैरिंग कैपेसिटी का वैज्ञानिक निर्धारण आवश्यक है, ताकि अधोसंरचना, पर्यावरण और स्थानीय संसाधनों पर पड़ने वाले प्रभाव का संतुलित प्रबंधन किया जा सके। उन्होंने विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में इस अध्ययन को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कैरिंग कैपेसिटी अध्ययन के आधार पर भविष्य में विकास कार्यों की योजना तैयार की जाएगी, जिससे आवास, सड़क, जल, सीवरेज और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हुए किया जा सके। सरकार का मानना है कि इस पहल से प्रदेश में योजनाबद्ध शहरी विकास, पर्यावरण संरक्षण और आवासीय सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण को नई दिशा मिलेगी। विशेष रूप से चारधाम और पर्वतीय क्षेत्रों में नियंत्रित और संतुलित विकास सुनिश्चित करने में यह अध्ययन अहम भूमिका निभाएगा।

 

 

 

 

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