उत्तराखंड

उत्तराखंड में मानसून का कहर, उफनते नालों के बीच जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे ग्रामीण..

उत्तराखंड में मानसून का कहर, उफनते नालों के बीच जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे ग्रामीण..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में मानसून के सक्रिय होते ही पहाड़ी इलाकों में मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। उत्तरकाशी जिले के मोरी विकासखंड में लगातार हो रही बारिश के चलते सांकरी–गंगाड़–ओसला मोटर मार्ग कई स्थानों पर खतरे का कारण बन गया है। हलारा और पूर्ति खड्ड में पानी का स्तर तेजी से बढ़ने के बाद सड़क पर तेज बहाव शुरू हो गया है, जिससे ग्रामीणों और वाहन चालकों के सामने आवाजाही का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक लगातार बारिश होती रही तो पवाणी, तालुका, ओसला, गंगाड़ और ढाटमीर गांवों का मोरी से सड़क संपर्क पूरी तरह बाधित हो सकता है। इन गांवों के हजारों लोग रोजमर्रा की जरूरतों, स्वास्थ्य सेवाओं और बाजार तक पहुंचने के लिए इसी मार्ग पर निर्भर हैं।

बारिश के कारण दोनों खड्डों का बहाव इतना तेज हो गया है कि वाहन निकालना किसी चुनौती से कम नहीं है। कई बार दोपहिया वाहनों को रस्सियों और स्थानीय लोगों की मदद से पार कराया जा रहा है। वहीं चारपहिया वाहन चालक भी जोखिम उठाकर सफर करने को मजबूर हैं। पैदल आने-जाने वालों के लिए भी यह रास्ता बेहद खतरनाक बन चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। हर साल बरसात के मौसम में हलारा और पूर्ति खड्ड उफान पर आ जाते हैं और पूरे क्षेत्र की आवाजाही प्रभावित हो जाती है। बावजूद इसके अब तक यहां स्थायी पुलों का निर्माण नहीं हो सका है। उनका आरोप है कि वर्षों से मांग उठाने के बावजूद संबंधित विभागों ने केवल अस्थायी समाधान किए हैं, जिससे हर मानसून में वही हालात दोबारा पैदा हो जाते हैं।

इस बार सबसे ज्यादा चिंता किसानों को सता रही है। क्षेत्र में सेब, राजमा और चौलाई जैसी नकदी फसलों का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। जल्द ही इन फसलों को मंडियों तक पहुंचाना होगा, लेकिन सड़क बंद होने की स्थिति में किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। इसके अलावा स्कूल जाने वाले बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार मरीजों के लिए भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं, क्योंकि आपात स्थिति में अस्पताल तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) से एक बार फिर मांग की है कि दोनों खड्डों पर स्थायी पुलों का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए। उनका कहना है कि अस्थायी इंतजाम हर साल बारिश के सामने बेकार साबित हो जाते हैं और लोगों की जान हमेशा खतरे में बनी रहती है।

इधर, जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि मोरी क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को मौके पर आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने, सड़क पर आवाजाही यथासंभव बहाल रखने और आपदा मद से वैकल्पिक व्यवस्थाएं तैयार करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और सतर्क रहने की भी अपील की है।

रुद्रप्रयाग में एहतियातन बंद किए गए स्कूल

लगातार बारिश का असर रुद्रप्रयाग जिले में भी देखने को मिला है। खराब मौसम और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने शुक्रवार को जिले के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों में अवकाश घोषित कर दिया। अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों के जलस्तर में लगातार वृद्धि होने के कारण प्रशासन ने लोगों से नदियों, गदेरों और बरसाती नालों के किनारे जाने से बचने की सलाह दी है। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और मौसम विभाग तथा प्रशासन द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

 

 

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