उपनल कर्मचारियों को बड़ी राहत..
विभागीय संविदा के तहत मानदेय भुगतान के निर्देश जारी..
उत्तराखंड: उत्तराखंड के विभिन्न सरकारी विभागों में लंबे समय से सेवाएं दे रहे उपनल कर्मचारियों के वेतन और सेवा संबंधी मामलों को लेकर शासन स्तर पर नई पहल हुई है। कोषागार, पेंशन एवं हकदारी निदेशालय ने प्रदेश के सभी कोषाधिकारियों और आहरण-वितरण अधिकारियों (डीडीओ) को निर्देश जारी किए हैं कि उपनल कर्मचारियों को विभागीय संविदा के दायरे में लाने की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए। साथ ही एक नवंबर 2026 तक ‘मानक मद 16-पूर्व उपनल कार्मिक समान कार्य वेतन’ के तहत मानदेय का भुगतान करने को कहा गया है। इस आदेश को लंबे समय से वेतन और सेवा संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, नियमितीकरण का मामला अब भी पूरी तरह सुलझा नहीं है। इसे लेकर कर्मचारी संगठनों में नाराजगी बनी हुई है। संगठनों का कहना है कि वर्षों से विभागों में काम करने के बावजूद कर्मचारियों को स्थायी सेवा लाभ नहीं मिल पा रहे हैं और मामला लगातार लंबित है।
अधिसंख्य पदों के लिए गठित हुई उच्चस्तरीय समिति
उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण से जुड़े मामले में नैनीताल हाईकोर्ट में जनहित याचिका संख्या 116/2018 (कुंदन सिंह बनाम उत्तराखंड राज्य एवं अन्य) के आदेश के क्रम में शासन ने 30 अक्टूबर 2026 को नया आदेश जारी किया है। सैनिक कल्याण अनुभाग की ओर से जारी आदेश के तहत अधिसंख्य पदों के सृजन पर निर्णय लेने के लिए अपर सचिव कार्मिक की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है। समिति में वित्त, न्याय और सैनिक कल्याण विभाग के अपर सचिवों को शामिल किया गया है। हालांकि, समिति के गठन से कर्मचारी संगठन पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि नई समितियां बनाने के बजाय पहले से मौजूद न्यायालय के आदेशों और शासन के निर्देशों को लागू किया जाना चाहिए। कर्मचारियों का तर्क है कि वे लंबे समय से संबंधित विभागों में काम कर रहे हैं और उनकी वास्तविक सेवा स्थिति को स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
वर्ष 2013 की नियमावली के तहत संविदा का दर्जा देने की मांग
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के पैरा 20 में कर्मचारियों और संबंधित विभागों के बीच सेवा संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण बातें कही गई हैं। संगठन के अनुसार उपनल केवल कर्मचारियों की नियुक्ति और भुगतान की व्यवस्था में माध्यम की भूमिका निभाता रहा है, जबकि कर्मचारी वास्तविक रूप से संबंधित विभागों में ही सेवाएं दे रहे हैं। संगठनों ने मांग की है कि वर्ष 2013 की प्रचलित नियमावली के अनुरूप कर्मचारियों की सेवा स्थिति स्पष्ट करते हुए विभागीय संविदा की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। उनका कहना है कि जब इस संबंध में नियम और पूर्व के आदेश मौजूद हैं, तो निर्णय लेने में लगातार देरी क्यों की जा रही है।
नियमितीकरण पर जल्द निर्णय लेने की मांग
उपनल कर्मचारी संगठनों ने सरकार से मांग की है कि नियमितीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि वर्षों से विभिन्न विभागों में सेवाएं देने वाले कर्मचारियों को बार-बार आश्वासन और नई समितियों के गठन के बजाय स्थायी समाधान मिलना चाहिए। कर्मचारी संगठनों ने यह भी आरोप लगाया है कि न्यायालय में मामला लंबे समय से लंबित है और सुनवाई के दौरान बार-बार समय मांगा जा रहा है। इससे कर्मचारियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। फिलहाल सभी की नजरें एक नवंबर 2026 तक मानदेय भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देशों पर टिकी हैं। अब देखना होगा कि निदेशालय के आदेश का विभागीय स्तर पर कितना प्रभावी क्रियान्वयन होता है और उपनल कर्मचारियों के संविदा तथा नियमितीकरण से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों पर सरकार कब तक अंतिम निर्णय लेती है।

