उत्तराखंड

पौड़ी गढ़वाल में गुलदार का आतंक, ग्रामीणों में भय का माहौल..

पौड़ी गढ़वाल में गुलदार का आतंक, ग्रामीणों में भय का माहौल..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में वन्यजीवों की बढ़ती गतिविधियां एक बार फिर चिंता का विषय बन गई हैं। पौड़ी वन प्रभाग से सटे घुड़दौड़ी क्षेत्र के जामलाखाल इलाके में गुलदार के हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और ग्रामीणों ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। मिली जानकारी के अनुसार, मृतक की उम्र लगभग 45 से 50 वर्ष के बीच बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि व्यक्ति क्षेत्र में अपने दैनिक कार्यों के लिए गया हुआ था, तभी घात लगाए बैठे गुलदार ने उस पर हमला कर दिया। हमला इतना अचानक था कि व्यक्ति को संभलने का मौका तक नहीं मिल पाया। आसपास मौजूद लोगों ने शोर मचाया, लेकिन तब तक गुलदार गंभीर नुकसान पहुंचा चुका था।

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने आसपास के इलाकों में गश्त बढ़ा दी है और स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। वन विभाग की ओर से हमलावर गुलदार की तलाश भी शुरू कर दी गई है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से गुलदार की गतिविधियां बढ़ी हुई हैं। शाम ढलते ही लोग घरों से बाहर निकलने में डर महसूस कर रहे हैं। बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर परिवारों की चिंता और बढ़ गई है। ग्रामीणों ने वन विभाग से नियमित गश्त और पिंजरा लगाने की मांग की है, जिससे आदमखोर वन्यजीव को पकड़ा जा सके। बता दे कि इसी क्षेत्र में इससे पहले भी गुलदार के हमले की घटना सामने आ चुकी है। बीती 14 जनवरी को नजदीकी बाड़ा गांव में गुलदार ने एक नेपाली मजदूर को अपना शिकार बना लिया था। लगातार हो रही घटनाओं ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं और लोगों में भय का माहौल गहरा गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों के सिमटने और मानव बस्तियों के विस्तार की वजह से वन्यजीव आबादी की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे में संवेदनशील इलाकों में निगरानी, जागरूकता और त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी हो गई है। फिलहाल वन विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित परिवार को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। वहीं ग्रामीणों को सतर्क रहने और अकेले जंगल या सुनसान इलाकों में न जाने की हिदायत दी गई है। लगातार हो रही घटनाओं ने प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

 

 

 

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