चारधाम यात्रा से पहले स्वास्थ्य विभाग मजबूत, 168 बॉन्डधारी डॉक्टरों की तैनाती..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। बॉन्ड व्यवस्था के तहत एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर चुके 168 डॉक्टरों को प्रदेश के विभिन्न जिलों में तैनाती देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार का उद्देश्य दूरस्थ पर्वतीय इलाकों और यात्रा मार्गों पर स्थित अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं को सुदृढ़ करना है, ताकि स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ तीर्थयात्रियों को भी समय पर बेहतर इलाज मिल सके। स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत ने जानकारी देते हुए कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर से पास आउट हुए 168 बॉन्डधारी एमबीबीएस डॉक्टरों को राज्य के अलग-अलग जिलों में नियुक्त किया जा रहा है। इन डॉक्टरों की तैनाती संबंधी सूची डीजी हेल्थ उत्तराखंड की ओर से सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को भेज दी गई है, ताकि जरूरत के अनुसार अस्पतालों में उनकी सेवाएं शुरू कराई जा सकें।
जिलों में डॉक्टरों की तैनाती भी तय कर दी गई है, जिसके तहत पौड़ी और टिहरी जिलों में 21-21 डॉक्टर भेजे जा रहे हैं। चमोली और उत्तरकाशी जिलों को 20-20 डॉक्टर मिलेंगे, जबकि रुद्रप्रयाग में 15 डॉक्टर तैनात किए जाएंगे। पिथौरागढ़ जिले में 23 और अल्मोड़ा जिले में 24 डॉक्टरों की नियुक्ति की गई है। वहीं चंपावत और बागेश्वर जिलों को 12-12 डॉक्टर आवंटित किए गए हैं। सरकार का मानना है कि इन नियुक्तियों से पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी काफी हद तक दूर हो सकेगी। राज्य में आगामी 19 अप्रैल से शुरू हो रही चारधाम यात्रा को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने विशेष तैयारी की है। यात्रा मार्गों पर स्थित अस्पतालों में अधिकांश बॉन्डधारी डॉक्टरों को तैनात करने की योजना बनाई गई है, क्योंकि हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्थित धामों की यात्रा पर पहुंचते हैं। हाई एल्टीट्यूड और मौसम में तेजी से बदलाव के कारण यात्रियों के बीमार पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में आपात स्थिति से निपटने और समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी डॉक्टरों की नियुक्ति बॉन्ड अनुबंध की शर्तों के आधार पर की गई है। यदि कोई डॉक्टर ड्यूटी से गैरहाजिर पाया जाता है या पद छोड़ता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार को उम्मीद है कि नई तैनातियों से न केवल चारधाम यात्रा के दौरान चिकित्सा व्यवस्थाएं मजबूत होंगी, बल्कि स्थानीय लोगों को भी अपने ही जिलों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी। स्वास्थ्य विभाग प्रदेश में चिकित्सा ढांचे को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार कदम उठा रहा है, ताकि आम जनता को गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध इलाज उपलब्ध कराया जा सके।