उत्तराखंड

बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक, बीकेटीसी का बड़ा निर्णय..

बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक, बीकेटीसी का बड़ा निर्णय..

 

 

उत्तराखंड: हिमालय की ऊंचाइयों, कठिन मार्गों और बदलते मौसम के बीच होने वाली पवित्र चार धाम यात्रा इस वर्ष 19 अप्रैल से शुरू होने जा रही है। यात्रा के प्रथम चरण में गंगोत्री मंदिर और यमुनोत्री मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। प्रशासन यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर पूरी तरह सतर्क है और सुरक्षा से लेकर सुविधाओं तक व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। इससे पहले राज्य सरकार चारधाम क्षेत्र में मोबाइल फोन उपयोग पर प्रतिबंध का निर्णय ले चुकी है।चारधाम यात्रा की तैयारियों के बीच एक बड़ा और चर्चित फैसला सामने आया है। बद्री-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने धामों के मंदिर परिसरों और गर्भगृह में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। समिति ने यह प्रतिबंध अपने अधीन आने वाले कुल 47 मंदिरों में लागू करने का प्रस्ताव पारित किया है। इनमें प्रमुख रूप से बद्रीनाथ मंदिर और केदारनाथ मंदिर जैसे विश्वप्रसिद्ध धाम शामिल हैं, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

समिति के इस निर्णय को चारधाम यात्रा से पहले धार्मिक मर्यादाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि उत्तराखंड के धाम केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि सनातन परंपराओं और गहन आध्यात्मिक साधना के केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि धामों की पवित्रता और धार्मिक गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है, ताकि तीर्थाटन की मूल भावना अक्षुण्ण रह सके। द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध केवल मंदिर परिसर और गर्भगृह की सीमा तक प्रभावी रहेगा। मंदिरों के बाहरी क्षेत्रों या यात्रा मार्गों पर इससे संबंधित कोई अलग व्यवस्था स्थानीय प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में होगी। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले सभी श्रद्धालुओं का धामों में स्वागत है, लेकिन धार्मिक परंपराओं और मर्यादाओं से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

चारधाम यात्रा से बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों और विभिन्न समुदायों की आजीविका भी जुड़ी होती है। परिवहन, घोड़ा-खच्चर सेवा, होटल-ढाबे, गाइड, पूजा सामग्री और अन्य सेवाओं के माध्यम से हजारों परिवारों को रोजगार मिलता है। ऐसे में गैर-हिंदू समुदायों की आजीविका पर संभावित असर को लेकर उठे सवालों पर बीकेटीसी अध्यक्ष ने कहा कि समिति का निर्णय केवल धार्मिक परिसरों तक सीमित है और रोजगार से जुड़े विषय प्रशासनिक स्तर पर देखे जाएंगे।यह अहम निर्णय बीकेटीसी की बजट बैठक के दौरान लिया गया, जिसकी अध्यक्षता स्वयं हेमंत द्विवेदी ने की। बैठक में आगामी वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए 121.7 करोड़ रुपये का बजट भी पारित किया गया। समिति ने मंदिरों के रखरखाव, तीर्थयात्री सुविधाओं के विस्तार, सुरक्षा प्रबंधन, धार्मिक आयोजनों और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए विभिन्न मदों में बजट आवंटन को मंजूरी दी।

इसी बैठक में सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव समिति के अधीन सभी मंदिरों में गैर-सनातनियों के प्रवेश निषेध से संबंधित रखा गया, जिस पर विस्तृत चर्चा के बाद सर्वसम्मति से मुहर लगा दी गई। इस फैसले के बाद चारधाम यात्रा और उत्तराखंड के प्रमुख मंदिरों की व्यवस्थाओं को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है। चारधाम यात्रा हर वर्ष न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टिकोण से भी उत्तराखंड के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। राज्य की आर्थिकी में तीर्थाटन का बड़ा योगदान है और यात्रा सीजन के दौरान स्थानीय कारोबार में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। ऐसे में यात्रा से जुड़े किसी भी निर्णय का व्यापक प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है। चारधाम यात्रा से ठीक पहले लिए गए इस फैसले पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं। धार्मिक परंपराओं की संरक्षण भावना, प्रशासनिक व्यवस्थाओं की मजबूती और सामाजिक संतुलन इन सभी पहलुओं के बीच यह निर्णय आने वाले समय में चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।

 

 

 

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top