देहरादून में नशे के कारोबार पर कसेगा शिकंजा, ड्रग्स माफिया रडार पर..
उत्तराखंड: युवाओं को नशे की गिरफ्त में आने से बचाने और मादक पदार्थों की तस्करी पर लगाम लगाने के लिए जिला प्रशासन ने कार्रवाई तेज करने का निर्णय लिया है। अब नशे की मांग और आपूर्ति, दोनों पर एक साथ प्रहार करने की रणनीति अपनाई जाएगी। इसके तहत शिक्षण संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रमों के साथ ड्रग्स टेस्टिंग अभियान चलाया जाएगा। जांच के लिए आवश्यक संसाधन बढ़ाने के उद्देश्य से दो नई सलाइवा-बेस्ड ड्रग्स टेस्टिंग मशीनों की खरीद के लिए भी धनराशि स्वीकृत की गई है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन समिति की बैठक में नशे के खिलाफ चल रही कार्रवाई की समीक्षा की गई। डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नशे के अवैध कारोबार में शामिल लोगों की पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने पर विशेष ध्यान दिया जाए।
स्कूल-कॉलेजों में चलेगा जागरूकता अभियान
जिलाधिकारी ने कहा कि स्कूल और कॉलेजों में पढ़ने वाले युवा नशा तस्करों के निशाने पर रहते हैं। ऐसे में शिक्षण संस्थानों में नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना जरूरी है। विद्यार्थियों को नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक नुकसान की जानकारी देने के साथ ड्रग्स टेस्टिंग अभियान भी चलाया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक शिक्षण संस्थान में महीने का एक दिन नशामुक्ति जागरूकता के लिए निर्धारित किया जाए। इस दिन छात्र-छात्राओं को नशे से दूर रहने की शपथ दिलाई जाए और उन्हें नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए प्रेरित किया जाए। डीएम ने स्पष्ट किया कि नशे के कारोबार को खत्म करने के लिए केवल तस्करों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। इसकी मांग कम करने के लिए भी लगातार प्रयास करने होंगे। युवाओं को नशे की ओर धकेलने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए गए।
नशामुक्ति केंद्रों और संवेदनशील क्षेत्रों की होगी जांच
प्रशासन ने नशे के नेटवर्क का पता लगाने के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी की है। जिलाधिकारी ने सभी उपजिलाधिकारियों को संबंधित थाना प्रभारियों के साथ अपने क्षेत्रों में नशामुक्ति केंद्रों, शिक्षण संस्थानों और आसपास की मलिन बस्तियों का निरीक्षण करने को कहा है। निरीक्षण के दौरान नशे की लत से जूझ रहे लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याओं और अनुभवों की जानकारी ली जाएगी। उनसे मिलने वाले सुरागों के आधार पर नशे की आपूर्ति से जुड़े नेटवर्क की पड़ताल कर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जिले के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में भांग की अवैध खेती रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। कल्याणपुरी में भांग की खेती की शिकायत मिलने पर आबकारी विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर फसल नष्ट कराई थी। इस मामले में जिलाधिकारी ने संबंधित क्षेत्र के पटवारी और ग्राम विकास अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा है। डीएम ने निर्देश दिए कि किसी भी क्षेत्र में भांग, अफीम, गांजा या चरस की अवैध खेती अथवा कारोबार मिलने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य ऐसे मामलों की समय रहते पहचान कर अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना है।
सितंबर में 147 ड्रग्स टेस्ट, सभी रिपोर्ट निगेटिव
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि सितंबर में शिक्षण संस्थानों में रैंडम सैंपलिंग के तहत 147 ड्रग्स टेस्ट किए गए। सभी जांचों की रिपोर्ट निगेटिव आई। नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों पर हेल्पलाइन नंबर 1933 से संबंधित पोस्टर और पंपलेट भी लगाए जा रहे हैं। पुलिस और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) की टीमें लोगों को एनडीपीएस एक्ट की जानकारी देने के साथ नशामुक्ति की शपथ भी दिला रही हैं। सितंबर माह के दौरान एएनटीएफ ने 95 स्थानों पर चेकिंग अभियान चलाया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सितंबर 2026 तक जिले में एनडीपीएस एक्ट के तहत 244 मुकदमे दर्ज किए गए। इन मामलों में 281 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। वाणिज्यिक मात्रा से संबंधित मादक पदार्थों के 15 मामलों में 23 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई। मेडिकल स्टोरों पर भी निगरानी बढ़ाई गई है। छापेमारी के दौरान आठ संदिग्ध दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे गए, जबकि एक मेडिकल स्टोर का लाइसेंस निरस्त किया गया। इसके अलावा सभी मेडिकल स्टोरों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य किया गया है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नशे के खिलाफ अभियान को केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा जाएगा। युवाओं को जागरूक करने, नशे की मांग कम करने और तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने के लिए पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वय बढ़ाया जाएगा।

