उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों पर सख्ती..
उल्लंघन पर लगेगा ताला और 5 लाख तक जुर्माना..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के संचालन और मान्यता से जुड़े नियमों को अधिक सख्त बनाया गया है। गैरसैंण विधानसभा सत्र में उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया गया। नए प्रावधानों के तहत निर्धारित नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ तालाबंदी से लेकर आर्थिक दंड तक की कार्रवाई की जा सकेगी। संशोधित व्यवस्था के अनुसार यदि जांच में धार्मिक शिक्षा से जुड़े निर्धारित प्रावधानों या अधिनियम में तय शर्तों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित संस्थान के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इसमें संस्थान में तालाबंदी, संचालकों पर अधिकतम पांच लाख रुपये का जुर्माना और रिसीवर नियुक्त करने जैसे प्रावधान शामिल हैं। यदि जांच के दौरान किसी आपराधिक कृत्य का पता चलता है, तो संबंधित कानूनों के तहत एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकेगी। हालांकि, किसी भी कार्रवाई से पहले संस्थान के संचालकों को अपना पक्ष रखने और सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य होगा।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
संशोधन विधेयक के तहत मूल अधिनियम की धारा 16 में नए प्रावधान जोड़े गए हैं। इनके अनुसार, यदि प्राधिकरण को सूचना मिलती है कि कोई संस्थान धारा 3 की उपधारा (1) या धारा 14 में निर्धारित शर्तों का उल्लंघन कर रहा है, तो मामले की जांच कराई जा सकेगी। जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर प्राधिकरण नियमानुसार कार्रवाई कर सकेगा। इसमें संस्थान के संचालन पर रोक लगाने के साथ आर्थिक दंड और रिसीवर की नियुक्ति जैसे कदम शामिल हैं। आपराधिक मामला सामने आने पर संबंधित कानूनी प्रक्रिया भी अपनाई जा सकेगी।
कक्षा आठ तक के स्कूलों की मान्यता के नियम स्पष्ट
संशोधन विधेयक में अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की परिभाषा और मान्यता व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। मूल अधिनियम की धारा 2 में संशोधन कर संस्थानों को शिक्षा के स्तर के आधार पर दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है। पहली श्रेणी में कक्षा आठ तक शिक्षा देने वाले संस्थान शामिल हैं। इन विद्यालयों के लिए सक्षम प्राधिकारी से मान्यता लेना जरूरी होगा। राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत मान्यता देने या उसका नवीनीकरण करने के लिए नामित अधिकारी को सक्षम प्राधिकारी माना जाएगा। दूसरी श्रेणी में कक्षा नौ से 12वीं तक पढ़ाई कराने वाले संस्थान शामिल हैं। इनके लिए उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद से संबद्धता का प्रावधान रखा गया है।
अधिनियम की कई धाराओं में संशोधन
विधेयक के तहत मूल अधिनियम की धारा 3 में भी बदलाव किया गया है। इसमें कुछ स्थानों पर केवल ‘परिषद’ के स्थान पर ‘परिषद/सक्षम प्राधिकारी’ शब्द शामिल किया गया है। इसी तरह धारा 12 की उपधारा (2) में भी संबंधित शब्दावली बदली गई है। इसके साथ ही उपधारा (3) से ‘उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद के अनुमोदन से’ शब्द हटाने का प्रस्ताव शामिल है। इन संशोधनों का उद्देश्य संस्थानों की मान्यता और नियमन से जुड़ी जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना तथा निर्धारित शर्तों का पालन सुनिश्चित करना है। नए प्रावधान लागू होने के बाद नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्राधिकरण को अधिक स्पष्ट कानूनी आधार मिलेगा।

