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सिरोबगड़ में राहत की उम्मीद, 126 करोड़ के बाईपास का अहम पुल बनकर तैयार..

सिरोबगड़ में राहत की उम्मीद, 126 करोड़ के बाईपास का अहम पुल बनकर तैयार..

 

 

 

उत्तराखंड: बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिरोबगड़ में भूस्खलन और जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए कालियासौड़–खांकरा बाईपास परियोजना पर काम आगे बढ़ रहा है। करीब 126 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को मई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना का एक महत्वपूर्ण पुल, जो तकनीकी दिक्कत के कारण पिछले चार साल से लंबित था, अब बनकर तैयार हो गया है। बाईपास के पूरा होने से रुद्रप्रयाग और चमोली के लोगों के साथ ही बद्रीनाथ और केदारनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं को भी राहत मिलने की उम्मीद है। सिरोबगड़ लंबे समय से पहाड़ी से मलबा और पत्थर गिरने के कारण यातायात बाधित होने की समस्या से जूझ रहा है। बारिश के मौसम में यहां खतरा बढ़ जाता है। वहीं, चारधाम यात्रा के दौरान वाहनों की संख्या बढ़ने से जाम की स्थिति गंभीर हो जाती है। कई बार सड़क बंद होने से यात्रियों और स्थानीय लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। इसका असर जरूरी सेवाओं और क्षेत्र के दैनिक आवागमन पर भी पड़ता है।

3.22 किलोमीटर लंबा होगा बाईपास
चारधाम परियोजना के अंतर्गत तैयार हो रहे कालियासौड़–खांकरा बाईपास की लंबाई करीब 3.22 किलोमीटर है। इसके निर्माण में अलकनंदा नदी पर दो पुल और एक नाले पर पुल बनाया जाना शामिल है। परियोजना में इन पुलों के स्पान क्रमशः 182 मीटर, 189 मीटर और 258 मीटर निर्धारित किए गए हैं। इस वैकल्पिक मार्ग के तैयार होने से सिरोबगड़ के संवेदनशील हिस्से पर यातायात की निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। भूस्खलन के कारण मुख्य मार्ग बाधित होने की स्थिति में बाईपास यात्रियों और स्थानीय वाहनों के लिए उपयोगी विकल्प बन सकता है। हालांकि, इसका लाभ मार्ग और उससे जुड़े सभी जरूरी निर्माण कार्य पूरे होने तथा यातायात शुरू होने के बाद ही मिल सकेगा।

चार साल से अटका पुल बना, परियोजना को मिली गति
बाईपास निर्माण के दौरान एक पुल का काम तकनीकी खामी के चलते लंबे समय से रुका हुआ था। करीब चार साल की देरी के बाद अब इसका निर्माण पूरा हो चुका है। इससे परियोजना के आगे के काम को गति मिलने की उम्मीद है। बाईपास का निर्माण सीमेंट-कंक्रीट से किया जा रहा है। पूरी परियोजना को मई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब निर्माण कार्य को तय समयसीमा के भीतर पूरा करना महत्वपूर्ण होगा, ताकि वैकल्पिक मार्ग का लाभ जल्द मिल सके।

चारधाम यात्रियों और स्थानीय लोगों को होगा फायदा
बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए सिरोबगड़ का रास्ता कई बार परेशानी का कारण बनता है। खासकर यात्रा सीजन और बरसात के दौरान सड़क बंद होने से यात्रा की अवधि बढ़ जाती है। बाईपास तैयार होने पर इस मार्ग पर यातायात का दबाव कम करने और आवाजाही को अधिक सुगम बनाने में मदद मिल सकती है। रुद्रप्रयाग और चमोली जिले के निवासियों को भी इस परियोजना से लाभ मिलने की संभावना है। स्थानीय लोगों के दैनिक आवागमन के साथ परिवहन और आपातकालीन सेवाओं को बेहतर विकल्प मिल सकता है। करीब छह दशक से चली आ रही सिरोबगड़ की समस्या के बीच कालियासौड़–खांकरा बाईपास को महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। अब सभी निर्माण कार्यों को निर्धारित समय पर पूरा करना जरूरी है। यदि बाईपास मई 2027 तक तैयार होकर यातायात के लिए खोल दिया जाता है, तो आने वाले चारधाम यात्रा सीजन में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की मुश्किलें कम करने में मदद मिल सकती है।

 

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