देहरादून में बेटियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन अलर्ट..
गांव-गांव के आंकड़ों की होगी जांच..
उत्तराखंड: देहरादून जिले में लिंगानुपात में सुधार और कन्या भ्रूण के लिंग की जांच जैसी अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने निगरानी बढ़ाने का फैसला लिया है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कम लिंगानुपात वाले गांवों को चिह्नित कर रेड जोन बनाने और ऐसे क्षेत्रों पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अल्ट्रासाउंड केंद्रों की नियमित जांच करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा है। कलेक्ट्रेट में आयोजित पीसीपीएनडीटी जिला सलाहकार समिति की बैठक में जिले के लिंगानुपात की स्थिति और अधिनियम के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। इस दौरान जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग को गांववार आंकड़ों का विश्लेषण कर उन क्षेत्रों की पहचान करने के निर्देश दिए, जहां लिंगानुपात में असामान्य स्थिति सामने आ रही है।
पांच साल के आंकड़ों का होगा विश्लेषण
बैठक में स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) के वर्ष 2025-26 के आंकड़ों पर चर्चा हुई। इन आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड का लिंगानुपात 939, जबकि देहरादून का 927 दर्ज किया गया। इस स्थिति पर चिंता जताते हुए जिलाधिकारी ने प्रत्येक गांव के पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों की समीक्षा करने को कहा। इसके आधार पर कम लिंगानुपात वाले क्षेत्रों को चिह्नित कर निगरानी और जागरूकता से जुड़े कदम उठाए जाएंगे। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि कन्या भ्रूण के लिंग की जांच कराने या करने वालों के विरुद्ध पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई की जाए। इसका उद्देश्य भ्रूण के लिंग के आधार पर होने वाले भेदभाव और अवैध जांच पर प्रभावी रोक लगाना है।
218 अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर रहेगी निगरानी
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज कुमार शर्मा को जिले में संचालित सभी 218 डायग्नोस्टिक एवं इमेजिंग केंद्रों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी बेहतर तरीके से की जा सके। बैठक में नए अल्ट्रासाउंड केंद्रों के पंजीकरण और पुराने पंजीकरण के नवीनीकरण से संबंधित आवेदनों की भी समीक्षा हुई। कुल 10 नए केंद्रों के पंजीकरण और 18 केंद्रों के नवीनीकरण के प्रस्तावों पर चर्चा की गई। डीएम ने निर्देश दिए कि किसी भी केंद्र को अनुमति देने से पहले जरूरी दस्तावेजों की जांच की जाए। इनमें उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का प्रमाण पत्र, मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की अनापत्ति, अग्निशमन सुरक्षा प्रमाण पत्र और जैव चिकित्सा अपशिष्ट के निस्तारण से संबंधित अनुबंध शामिल हैं। सभी निर्धारित मानक पूरे होने पर ही पंजीकरण या नवीनीकरण की अनुमति दी जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में 218 क्रियाशील डायग्नोस्टिक एवं इमेजिंग केंद्र हैं, जिनमें कुल 420 अल्ट्रासाउंड मशीनें स्थापित हैं। जिला निरीक्षण एवं मूल्यांकन समिति ने सितंबर माह में 84 केंद्रों का निरीक्षण किया, जबकि वर्ष 2026 में अब तक निरीक्षण किए गए केंद्रों की कुल संख्या 117 बताई गई है
निरीक्षण के दौरान नियमों का उल्लंघन मिलने पर तीन केंद्रों की अल्ट्रासाउंड मशीनें सील की गई हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि केंद्रों के संचालन में निर्धारित मानकों का पालन अनिवार्य होगा और किसी भी तरह की अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
डोईवाला और कालसी में सबसे कम लिंगानुपात
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बैठक में बताया कि जिले का लिंगानुपात 927 से बढ़कर 937 हुआ है। हालांकि, विभिन्न क्षेत्रों के आंकड़ों में अंतर सामने आया है। वर्ष 2026-27 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार डोईवाला में लिंगानुपात 885 और कालसी में 887 दर्ज किया गया। वहीं सहसपुर में यह आंकड़ा 924, रायपुर में 949, विकासनगर में 1000 और चकराता में 1060 रहा। प्रशासन का जोर अब कम लिंगानुपात वाले क्षेत्रों में विशेष निगरानी बढ़ाने, स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई को प्रभावी बनाने और पीसीपीएनडीटी अधिनियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने पर है। बैठक में अपर जिलाधिकारी केके मिश्रा, सीएमओ डॉ. मनोज कुमार शर्मा, पीसीपीएनडीटी जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. बिमलेश जोशी सहित समिति के विभिन्न सदस्य मौजूद रहे।

