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उत्तराखंड

सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा के लिए नई कवायद..

सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा के लिए नई कवायद..

जियो रेफरेंसिंग और मैपिंग का काम तेज..

 

 

 

उत्तराखंड: सरकारी जमीन और विभागीय परिसंपत्तियों को अतिक्रमण से बचाने के लिए जिला प्रशासन ने डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की कवायद तेज कर दी है। जिले में विभिन्न विभागों के अधीन आने वाली सरकारी भूमि और परिसंपत्तियों की जियो रेफरेंसिंग, मैपिंग और सत्यापन का काम प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के निर्देश पर चल रहे इस अभियान की प्रगति की समीक्षा अपर जिलाधिकारी प्रशासन स्मृता परमार ने संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक में की। बैठक में विभागवार परिसंपत्तियों की स्थिति और अब तक हुए डिजिटल मैपिंग कार्य की जानकारी ली गई।

6,219 परिसंपत्तियों की मैपिंग पूरी
प्रशासन के अनुसार जिले में अलग-अलग विभागों की कुल 12,127 परिसंपत्तियां चिन्हित की गई हैं। इनमें से अब तक 6,219 परिसंपत्तियों की मैपिंग पूरी हो चुकी है। यानी कुल चिन्हित परिसंपत्तियों में करीब 51 फीसदी का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा चुका है। प्रशासन का लक्ष्य शेष परिसंपत्तियों की मैपिंग और जियो रेफरेंसिंग का काम भी तय समय सीमा में पूरा करना है। इसके लिए संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

डिजिटल मैपिंग पूरी होने के बाद सरकारी जमीन की वास्तविक स्थिति, सीमाएं और लोकेशन का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा। इससे किसी भूमि पर अतिक्रमण की स्थिति सामने आने पर संबंधित विभाग और प्रशासन को कार्रवाई करने में आसानी होगी। अपर जिलाधिकारी प्रशासन ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन परिसंपत्तियों का सत्यापन या मैपिंग अभी बाकी है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। साथ ही विभागवार प्रगति की नियमित समीक्षा भी करने को कहा गया है। प्रशासन का मानना है कि सरकारी भूमि और परिसंपत्तियों का अपडेट डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से इनकी निगरानी और संरक्षण की व्यवस्था मजबूत होगी। भविष्य में जमीन की पहचान, सीमांकन और उसके इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी भी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी। बैठक में जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी एसके गिरी समेत नगर निगम और विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

 

 

 

 

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