उत्तराखंड

युवाओं की तकनीकी सोच से बदलेंगे उत्तराखंड की चुनौतियों के समाधान..

युवाओं की तकनीकी सोच से बदलेंगे उत्तराखंड की चुनौतियों के समाधान..

90 दिन चलेगा हैकाथॉन..

 

उत्तराखंड: आपदा, ट्रैफिक, स्वास्थ्य सेवाओं और पर्यावरण जैसी उत्तराखंड की जमीनी चुनौतियों के लिए तकनीकी समाधान तैयार करने की दिशा में उत्तराखंड इनोवेशन एंड सॉल्यूशंस हैकाथॉन-2026 शुरू हो गया है। मंगलवार को ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के साथ 90 दिन चलने वाली इस पहल की शुरुआत हुई। कार्यक्रम में करीब 500 छात्र-छात्राओं के अलावा शिक्षक, शिक्षाविद, तकनीकी विशेषज्ञ और युवा इनोवेटर्स शामिल हुए। इस दौरान राज्य की स्थानीय समस्याओं को तकनीक से जोड़कर ऐसे समाधान विकसित करने पर चर्चा हुई, जिन्हें आगे वास्तविक स्तर पर इस्तेमाल किया जा सके। हैकाथॉन में उत्तराखंड की जरूरतों के अनुरूप अलग-अलग विषयों पर तकनीकी समाधान तैयार किए जाएंगे। इनमें आपदा प्रबंधन, यातायात और भीड़ नियंत्रण, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, पर्यावरण, वन्यजीव संरक्षण, पर्यटन और सुशासन प्रमुख हैं। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, जीआईएस और ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल से सरकारी सेवाओं और निगरानी व्यवस्था को बेहतर बनाने वाले आइडिया भी विकसित किए जाएंगे।

तीर्थयात्रा और पर्यटन के दबाव पर भी रहेगा फोकस..

उत्तराखंड में पर्यटन और चारधाम यात्रा के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए तकनीक आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट पर भी काम होगा। पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की आवाजाही का पूर्वानुमान लगाने, संवेदनशील क्षेत्रों में पर्यावरणीय दबाव की निगरानी करने और आपदा संभावित इलाकों की पहचान जैसे विषयों पर प्रतिभागी समाधान तैयार करेंगे। दूरदराज के पर्वतीय क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं को लोगों तक आसानी से पहुंचाने और आपात स्थिति में राहत एवं बचाव व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए भी तकनीकी मॉडल विकसित किए जाएंगे।

AI और ड्रोन से जुड़े प्रोजेक्ट भी होंगे तैयार
हैकाथॉन में सरकारी स्तर पर एआई के उपयोग से जुड़े कई विषयों को शामिल किया गया है। एआई आधारित नॉलेज रिपॉजिटरी, डेटा गवर्नेंस, जीआईएस आधारित विश्लेषण और पर्यावरण से जुड़े डेटा की समझ विकसित करने वाले प्रोजेक्ट तैयार किए जाएंगे। इसके साथ ही डीपीआर और आरएफपी तैयार करने में एआई के उपयोग तथा ड्रोन के माध्यम से एरियल मॉनिटरिंग से जुड़े समाधान भी प्रतिभागियों के सामने चुनौती के रूप में रखे गए हैं। 90 दिन के इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों को केवल आइडिया देने तक सीमित नहीं रखा जाएगा। शुरुआत समस्या की पहचान और आइडिएशन से होगी। इसके बाद चयनित विचारों पर प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे।

विशेषज्ञों की मेंटरिंग और मूल्यांकन के विभिन्न चरणों के बाद उपयोगी तकनीकी समाधानों को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा। जरूरत के अनुसार इन्हें इन्क्यूबेशन और इंडस्ट्री लिंकेज से भी जोड़ा जाएगा। कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर सूचना प्रौद्योगिकी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों में राज्य की परिस्थितियों के अनुरूप नए समाधान विकसित करने की क्षमता है। उन्होंने युवाओं से तकनीक और नवाचार को वास्तविक जनसमस्याओं से जोड़ने पर जोर दिया। उनका कहना है कि तकनीकी प्रयोग तभी उपयोगी होंगे, जब उनका लाभ आम लोगों और सरकारी सेवाओं तक पहुंच सके।

ITDA और तकनीकी संस्थाओं की साझेदारी
यह हैकाथॉन सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (ITDA) की ओर से Axolotl Emprise LLP और अन्य संस्थागत एवं तकनीकी सहयोगियों के साथ आयोजित किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार पहल का उद्देश्य सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थानों, तकनीकी विशेषज्ञों और युवा इनोवेटर्स को एक साझा मंच पर लाना है, ताकि उत्तराखंड की स्थानीय चुनौतियों के लिए राज्य के भीतर ही तकनीकी समाधान विकसित किए जा सकें।

 

 

 

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