शिव-पार्वती विवाह स्थल त्रियुगीनारायण धाम बना आस्था का केंद्र, 2.32 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे..
उत्तराखंड: चारधाम यात्रा के दौरान इस वर्ष उत्तराखंड के प्रसिद्ध त्रियुगीनारायण धाम में श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड संख्या देखने को मिल रही है। भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह स्थल के रूप में विश्वभर में प्रसिद्ध इस पौराणिक धाम में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। धार्मिक आस्था, पौराणिक महत्व और बेहतर होती सुविधाओं के चलते यह मंदिर अब चारधाम यात्रा का एक प्रमुख आकर्षण बनता जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार 22 अप्रैल से अब तक 2 लाख 32 हजार 738 श्रद्धालु यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और अखंड धूनी के दर्शन कर चुके हैं। त्रियुगीनारायण धाम हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी पवित्र स्थान पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। विवाह समारोह में भगवान विष्णु ने माता पार्वती के भाई की भूमिका निभाई थी, जबकि ब्रह्मा जी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विवाह संपन्न कराया था। उस समय प्रज्ज्वलित की गई पवित्र अग्नि आज भी मंदिर परिसर में अखंड धूनी के रूप में निरंतर जल रही है। इसी कारण यह धाम वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि और दांपत्य सौभाग्य से जुड़ी आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
चारधाम यात्रा पर आने वाले अधिकांश श्रद्धालु केदारनाथ धाम के दर्शन के बाद त्रियुगीनारायण पहुंचकर भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह स्थल के दर्शन को अपनी यात्रा का अभिन्न हिस्सा बना रहे हैं। मंदिर परिसर में स्थित ब्रह्म कुंड, रुद्र कुंड, विष्णु कुंड और सरस्वती कुंड भी श्रद्धालुओं की विशेष आस्था के केंद्र बने हुए हैं। मान्यता है कि इन पवित्र कुंडों में स्नान और पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति आती है तथा मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही वजह है कि नवविवाहित दंपतियों के साथ-साथ विवाह योग्य युवक-युवतियां भी बड़ी संख्या में यहां पहुंचकर विशेष पूजा-अर्चना कर रहे हैं। इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा दी है। क्षेत्र के होटल, होमस्टे, भोजनालय, टैक्सी संचालक, प्रसाद विक्रेता और स्थानीय हस्तशिल्प कारोबारियों के व्यवसाय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक पर्यटन के विस्तार से क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं और बड़ी संख्या में युवाओं को अपने गांव में ही आजीविका का साधन मिलने लगा है।
स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि सड़क संपर्क, पार्किंग व्यवस्था और अन्य आधारभूत सुविधाओं में हुए सुधार का सीधा असर श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के रूप में दिखाई दे रहा है। चारधाम यात्रा के साथ त्रियुगीनारायण धाम को जोड़ने से यहां पर्यटन गतिविधियां पहले की तुलना में काफी बढ़ी हैं, जिससे पूरे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिली है। आंकड़ों के अनुसार 22 अप्रैल से अब तक 1,11,530 पुरुष, 1,01,477 महिलाएं और 19,731 बच्चे सहित कुल 2,32,738 श्रद्धालु त्रियुगीनारायण धाम पहुंच चुके हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु भगवान शिव और माता पार्वती के समक्ष पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि, वैवाहिक जीवन की खुशहाली और विश्व शांति की कामना कर रहे हैं।
इस बीच स्थानीय व्यापार संघ ने भी सरकार से धाम में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की मांग की है। व्यापार संघ अध्यक्ष महेन्द्र प्रसाद सेमवाल का कहना है कि श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए पार्किंग क्षमता बढ़ाने, पैदल मार्गों का विस्तार, बेहतर प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता, पेयजल, शौचालय और आवासीय सुविधाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि यदि सुनियोजित तरीके से विकास कार्य किए जाएं तो त्रियुगीनारायण धाम को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर भी एक नई पहचान मिल सकती है।चारधाम यात्रा के दौरान जिस तरह श्रद्धालुओं का रुझान त्रियुगीनारायण धाम की ओर लगातार बढ़ रहा है, उससे यह स्पष्ट है कि आने वाले वर्षों में यह पौराणिक स्थल उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन केंद्रों में और अधिक महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर सकता है।