उत्तराखंड

परिवार रजिस्टर में नाम जोड़ने की प्रक्रिया होगी कड़ी, नई नियमावली को कैबिनेट की मंजूरी की तैयारी..

परिवार रजिस्टर में नाम जोड़ने की प्रक्रिया होगी कड़ी, नई नियमावली को कैबिनेट की मंजूरी की तैयारी..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड के सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों से अवैध बसावट और दस्तावेजी फर्जीवाड़े के कारण जनसांख्यिकीय संतुलन बिगड़ने की आशंकाओं को देखते हुए राज्य सरकार अब सख्त कदम उठाने जा रही है। इसके तहत परिवार रजिस्टर में नाम जोड़ने की प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक कठोर बनाया जाएगा और इसके लिए नई नियमावली लागू की जाएगी। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि इस विषय पर जल्द ही कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा। सीएम ने कहा कि परिवार रजिस्टर में बीते वर्षों में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं, जो राज्य की सामाजिक संरचना और सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं हैं। कहा कि प्रारंभिक जांच और प्रशासनिक रिपोर्टों में यह सामने आया है कि कुछ जिलों और शहरी क्षेत्रों में बिना वैध आधार के नाम दर्ज किए गए, जिससे स्थानीय आबादी के स्वरूप में असंतुलन पैदा हुआ।

उन्होंने इसे राज्यहित के खिलाफ बताते हुए व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। सीएम ने कहा कि देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल, पौड़ी जनपद के कोटद्वार क्षेत्र, टिहरी के मुनिकीरेती, चंपावत के बनबसा और टनकपुर जैसे इलाकों में यह समस्या अधिक गंभीर रूप में सामने आई है। इन क्षेत्रों में जनसंख्या के स्वरूप में आए बदलाव को लेकर सरकार गंभीर है। नई नियमावली के तहत परिवार रजिस्टर में नाम जोड़ने से पहले सत्यापन प्रक्रिया को मजबूत किया जाएगा। स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक जांच, दस्तावेजों की गहन पड़ताल और डिजिटल रिकॉर्ड से मिलान जैसे प्रावधान शामिल किए जाने की संभावना है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वास्तविक और पात्र व्यक्तियों के नाम ही सरकारी अभिलेखों में दर्ज हों। राज्य सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल अवैध बसावट पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा, सामाजिक संतुलन और प्रशासनिक विश्वसनीयता भी मजबूत होगी। आने वाले दिनों में कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद नई नियमावली को लागू किया जाएगा।

सीएम धामी ने साफ शब्दों में कहा कि वह भावी पीढ़ी को असुरक्षित उत्तराखंड नहीं देना चाहते। उनका कहना है कि राज्य की सामाजिक स्थिरता और सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। इसी सोच के तहत सरकार ऐसे हर संभावित खतरे पर सख्ती से कार्रवाई करेगी, जो प्रदेश के भविष्य के लिए चुनौती बन सकता है। शासन स्तर के अधिकारियों के अनुसार परिवार रजिस्टर में दर्ज नामों की संख्या में असामान्य और अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कई मामलों में यह भी सामने आया है कि रजिस्टर में किए गए प्रविष्टियों पर संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर तक मौजूद नहीं हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वर्तमान व्यवस्था में परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज होते जा रहे हैं, लेकिन कई जगहों पर न तो समुचित जांच-पड़ताल की जा रही है और न ही दस्तावेजों का सही तरीके से सत्यापन हो रहा है। इसी लापरवाही का फायदा उठाकर कुछ लोग नियमों को दरकिनार करते हुए अपना नाम सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करा रहे हैं।

परिवार रजिस्टर को लेकर सामने आ रही अनियमितताओं के पीछे वर्तमान नियमों की कमजोरी और अस्पष्टता को एक बड़ी वजह माना जा रहा है। शासन स्तर पर हुई समीक्षा में यह बात सामने आई है कि मौजूदा नियम न तो पर्याप्त रूप से स्पष्ट हैं और न ही वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप प्रभावी साबित हो रहे हैं। वर्तमान व्यवस्था में परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज कराने के लिए केवल “निवासी” होने की शर्त रखी गई है, लेकिन यह कहीं भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि संबंधित व्यक्ति कितने समय से उस क्षेत्र का निवासी होना चाहिए। इसी अस्पष्टता का लाभ उठाकर कई मामलों में बिना स्थायी निवास के ही नाम दर्ज कराए जाने की शिकायतें मिली हैं। अब प्रस्तावित नियमावली में इस कमी को दूर करते हुए निवासी की स्पष्ट परिभाषा तय की जाएगी। इसके साथ ही सेवा के अधिकार अधिनियम के तहत परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने की समय सीमा फिलहाल तीन दिन निर्धारित है।

अधिकारियों के अनुसार इतनी कम अवधि में समुचित भौतिक सत्यापन और दस्तावेजी जांच संभव नहीं हो पाती, जिसके कारण कई बार बिना पूरी पड़ताल के ही नाम दर्ज हो जाते हैं। इसे भी अव्यवस्था की एक अहम वजह माना जा रहा है। सरकार अब इस समय सीमा को बढ़ाने की तैयारी कर रही है, ताकि पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही परिवार रजिस्टर में नाम जोड़े जा सकें। प्रस्ताव है कि स्थानीय स्तर पर पुलिस सत्यापन, राजस्व अभिलेखों से मिलान और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की पुष्टि को अनिवार्य किया जाए। इसके साथ ही परिवार रजिस्टर के प्रपत्र में भी बदलाव किया जा सकता है। नए कॉलम जोड़े जाएंगे, जिनमें निवास की अवधि, भूमि या मकान से संबंधित विवरण और सत्यापन अधिकारी की स्पष्ट जिम्मेदारी दर्ज की जाएगी। शासन के संज्ञान में यह बात भी आई है कि कई क्षेत्रों में स्थानीय व्यक्तियों के नाम पर बड़े पैमाने पर प्लॉटिंग की जा रही है, जिसके पीछे बाहरी लोगों का अप्रत्यक्ष प्रवेश एक कारण माना जा रहा है। इसी वजह से कई इलाकों में जनसांख्यिकीय संतुलन तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है।

 

 

 

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