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उत्तराखंड

घस्यारी योजना से किसानों और महिलाओं को लाभ..

घस्यारी योजना से किसानों और महिलाओं को लाभ..

अब 100 करोड़ के टर्नओवर पर सरकार की नजर..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में पशुपालकों और ग्रामीण महिलाओं को राहत देने के लिए मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना को और मजबूत करने की तैयारी है। सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने साइलेज फेडरेशन को अगले एक साल में 100 करोड़ रुपये का कारोबार हासिल करने का लक्ष्य दिया है। उन्होंने देहरादून के अजबपुर में फेडरेशन के नए कार्यालय का उद्घाटन करते हुए योजना के जरिए किसानों, पशुपालकों और महिला समूहों को मिल रहे लाभों की जानकारी दी। कार्यक्रम में साइलेज फेडरेशन के अध्यक्ष हर्षुल वर्मा, प्रबंध निदेशक मोनिका चुनेरा, संयुक्त निबंधक रविंद्री मंदरवाल और महाप्रबंधक सुमन कुमार सहित विभाग के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।

10 हजार से अधिक महिलाओं को मिल रहा लाभ
घस्यारी कल्याण योजना का उद्देश्य पहाड़ी क्षेत्रों में पशुओं के लिए चारा जुटाने में महिलाओं की मेहनत कम करना है। योजना के तहत पशुपालकों को पैकिंग में पौष्टिक हरा चारा उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे महिलाओं को जंगलों से घास लाने में लगने वाले समय और श्रम से राहत मिल रही है। सहकारिता मंत्री के अनुसार, प्रदेश में 10 हजार से अधिक महिलाएं इस पहल से लाभान्वित हो रही हैं। वहीं, मक्का उत्पादक किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए बाजार तलाशने की परेशानी कम हुई है। साइलेज फेडरेशन किसानों से मक्का खरीदकर उसे पशुओं के उपयोग के लिए चारे के रूप में उपलब्ध कराने की व्यवस्था कर रहा है।

3.50 करोड़ से शुरू हुआ कारोबार 50 करोड़ के पार
डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि वर्ष 2019 में इस पहल की शुरुआत के समय 3.50 करोड़ रुपये का ऋण लिया गया था। उस दौरान इससे 375 मक्का किसान जुड़े थे। अब फेडरेशन का कारोबार 50 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। उन्होंने बताया कि अब तक मक्का उत्पादक किसानों को 15 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। योजना से 2,500 से अधिक किसान और 10 हजार से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। इसके अलावा, गांवों तक पशुचारा पहुंचाने में सहयोग कर रही बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (एम-पैक्स) को प्रोत्साहन राशि के रूप में 2.70 करोड़ रुपये दिए गए हैं।पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाने के लिए साइलेज फेडरेशन जल्द ही टोटल मिक्स्ड राशन (टीएमआर) यूनिट शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इस व्यवस्था के तहत पशुओं को उनकी पोषण संबंधी जरूरतों के अनुरूप संतुलित आहार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। इस पहल से पशुओं के पोषण में सुधार, चारे की उपलब्धता और दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। मंत्री के मुताबिक, पशुपालकों को सहायता देने के लिए अब तक 80 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी भी दी जा चुकी है।

किसानों और पशुपालकों को जोड़ने पर जोर
सरकार की योजना साइलेज फेडरेशन के माध्यम से मक्का उत्पादकों, पशुपालकों और सहकारी समितियों को एक व्यवस्था से जोड़ने की है। इससे किसानों को उपज का बाजार मिलने, पशुपालकों को पौष्टिक चारा उपलब्ध होने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार व आय के अवसर बढ़ने की संभावना है। फेडरेशन के लिए निर्धारित 100 करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य इसी व्यवस्था को विस्तार देने की दिशा में अहम माना जा रहा है। अब इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उत्पादन, वितरण और सहकारी समितियों की भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा।

 

 

 

 

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