उत्तराखंड

पाँच किमी पैदल चलकर स्कूल पहुँचते थे ज़िलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल

एक साइंटिस्ट जो बन गया सोशल इंजीनियर
रुद्रप्रयाग के डीएम हैं मंगेश घिल्डियाल

मोहित डिमरी 

नाम, शोहरत और पैसा, आज के ब्यूरोक्रेट के पास क्या नहीं है, लेकिन यह विडम्बना ही है कि अधिकांश ब्यूरोक्रेट अकर्मण्य बन कर कुर्सी का सुख भोगते हैं और उन्हें जनता के दुख-दर्द की जरा भी परवाह नहीं होती है। ऐसे में न तो नेता और न ही नौकरशाह जनता की सुनते हैं तो जनता रामभरोसे ही दिन गुजारती है। लेकिन देश-प्रदेश में कुछ ऐसे भी ब्यूरोक्रेट हैं जो जनता के दिलों पर राज करते हैं। इनकी बदौलत ही जनता का लोकतंत्र में विश्वास है। देश के थिंक टैंक माने जाते हैं ब्यूरोक्रेट। यदि एक नौकरशाह डीएम है और उसे अपनी प्रशासनिक और न्यायिक शक्तियों का ईमानदारी से प्रयोग करना आता है तो वह किसी भी जिले की तस्वीर व तकदीर बदल सकता है। ऐसे ही एक डीएम हैं मंगेश घिल्डियाल। अपनी माटी और थाती से गहरे जुड़े हुए। अल्प समय में ही आईएएस अफसर मंगेश घिल्डियाल ने अपने कुशल प्रबंधन और व्यवहार से प्रदेश की जनता का दिल जीत लिया है। आलम यह है कि जब हाल में उनका तबादला बागेश्वर से रुद्रप्रयाग कर दिया गया तो उनके तबादले के खिलाफ बागेश्वर की जनता सड़कों पर उतर आई। रुद्रप्रयाग के डीएम मंगेश जनता के लिए जनता के बीच जाकर जनसुनवाई करते हैं। जरूरत पड़ने पर वह चौपाल लगाते हैं और जनता की शिकायतों का यथासंभव समाधान करते हैं।

गांव की पगडंडी से रेड कारपेट का सफर
डीएम मंगेश घिल्डियाल की कहानी भी एक आम पहाड़ी की है, यानी विरासत में संघर्ष और त्याग की कथा। मंगेश संघर्ष की भट्टी में तपकर कुंदन बने और आज अपनी चमक पूरे प्रदेश में बिखेर रहे हैं। आईएएस मंगेश घिल्डियाल का जन्म पौड़ी जिले के धुमाकोट तहसील के तहत डांडयू गांव में हुआ। उनके पिता प्राइमरी स्कूल में टीचर हैं और माता गृहणी हैं। मंगेश की प्राथमिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय डांडयू गांव से हुई। इससे आगे की पढ़ाई के लिए वे गांव से पांच किमी दूर राजकीय उच्चतर प्राथमिक विद्यालय पटोटिया जाते थे। उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई राजकीय इंटर कॉलेज रामनगर से की और बीएससी राजकीय स्नातकोत्तर रामगनर से किया। बीएससी के बाद एमएससी फिजिक्स डीएसबी कैंपस नैनीताल कुमाऊं यूनिवर्सिटी से किया। जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल बताते हैं कि एमएमसी की पढ़ाई के साथ ही जिम्मेदारी भी थी। पिताजी शिक्षक थे तो सेलरी भी उतनी नहीं थी। भाई और बहिन भी पढ़ाई कर रहे थे। तीनों एक समय में ही पढ़ रहे थे। ऊपर से नैनीताल में हॉस्टल में रहते थे तो परिवार पर आर्थिक भार काफी था। उस समय यह कोशिश थी कि कहीं न कहीं जॉब के लिए निकल जाएं। जब एमएससी फिजिक्स किया था तो उस समय गेट का एग्जाम दिया। तो उसमें सेलेक्शन होने के बाद इंदौर से एमटेक किया। लेजर साइंस से एमटेक किया तो फाइनल इयर 2006 में डीआरडीओ में साइंटिस्ट के रूप में तैनाती हो गई।

 

 

सिविल सर्विसेज की तैयारी
पहली बार मिली 131वीं रैंक
जब साइंटिस्ट के पद पर सेलेक्शन हो जाता है तो लगता है कि जॉब इंश्योरेंस हो जाता है। पहले से ही इच्छा थी कि सिविल सर्विसेस में जाना है, तो जॉब लगने के बाद ये एहसास हुआ कि अब तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। पहली पोस्टिंग देरादून में आईआईआरडी लैबोरेट्री में हुई। यहां सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करना शुरू कर दिया। हम तीन साइंटिस्ट थे, जो तैयारी कर रहे थे। उस समय देहरादून में उतना अच्छा माहौल नहीं था। हालांकि अब देहरादून में काफी कोचिंग सेंटर खुल गए हैं और माहौल भी बेहतर मिल रहा है। उस समय जो भी कोचिंग इंस्टिट्यूट थे, वो स्टेट सर्विस की कोचिंग कराते थे। उत्तराखंड पीसीएस और यूपी पीसीएस की तैयारी कराते थे। सिविल सेवा आईएएस की तैयारी कोई संस्थान नहीं कराता था। कुछ बुक स्टडी की, फिर गाइडेंस लिया। पहली बार में 131वीं रैंक के साथ आईपीएस में सेलेक्शन हुआ।

हिंदी मीडियम अभ्यर्थी के लिए थोड़ी अधिक मेहनत
डीएम मंगेश घिल्डियाल सहज भाव से कहते हैं कि चूंकि हम लोग सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले हैं। अगर हम हिंदी माध्यम चयन करते हैं तो फिर तो थोड़ा आसानी होती है, लेकिन इंग्लिश माध्यम का चयन करते हैं तो भाषागत की प्राब्लम होती है। अपने आप को भी एक्सप्रेस करने में भी परेशानी होती है। एमटेक के बाद जैसे ही साइंटिस्ट में सेलेक्शन हुआ तो उसके बाद ऐसी समस्या शुरू होती है। माना उत्तराखंड के रहने वाले जो बच्चे हैं जो पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली समेत अन्य पहाड़ी जिलो के हैं, यहीं रहकर तैयारी नहीं कर पाते हैं। उन्हें गाइडेंस नहीं मिल पाता है। आज तो इंटरनेट पर काफी चीजें हो गई हैं। अब पैटर्न भी चेंज हो गया है। एक जीएस का पेपर होता है। जीएस में तो हमको एनसीआरटीआई का पूरा इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र जितने भी विषय होते हैं, सभी पढ़ने होते हैं। उसके साथ ही ऑप्शनल सब्जेक्ट होता है। आप्शनल में अगर किसी ने एमए भूगोल से किया है, इतिहास से किया है, तो वह अपना सब्जेक्ट रख सकते हैं, क्योंकि ऑप्शनल हम शुरू से पढ़ते हैं तो उसमें कोई प्राब्लम नहीं होती है। मुख्य रूप से जीएस पर फोकस करना होता है। तो कोचिंग इंस्टिट्यूट के नोटस भी काफी सारे मिलते हैं। करेंट अफेयर्स, न्यूज पेपर, मैगजीन है लगातार पढ़ते रहेंगे तो निश्चित रूप से उसमें सहायता मिलेगी।

तराश रहे हैं युवाओं का भविष्य
मंगेश घिल्डियाल कुछ अलग किस्म के हैं। युवा हैं, जोश है और कुछ हटकर करने का जज्बा भी। वह मानते हैं कि यदि प्रदेश की किस्मत बदलनी है तो अभिनव प्रयास करने होंगे। शायद यही कारण है कि बागेश्वर के डीएम रहते हुए उन्होंने वहां के युवाओं को निशुल्क सिविल सर्विस की तैयारी करानी शुरू कर दी थी। आफिस समय से पहले और आफिस के बाद वह सिविल सेवा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को टिप्स देते थे। पढ़ाते थे। मंगेश को अपने समय में जो कोचिंग नहीं मिली, संभवतः वह चाहते हैं कि युवाओं को कोचिंग की कमी न खले। वह रुद्रप्रयाग में भी इसी तरह की कोचिंग देना चाहते हैं।
बकौल डीएम मंगेश घिल्डियाल, ‘अगर हम लोग देखेंगे बागेश्वर में हमने रोडमैप भी बना दिया था, जिलास्तरीय अधिकारियों का भी सहयोग था। अगर रुद्रप्रयाग में कर पाए तो संतुष्टि रहेगी। अभी सेशन जुलाई से शुरू हो जाएगा। बच्चों का ओरिएंटेशन देख लेते हैं। बच्चे चाहते हैं तो शुरू कर सकते हैं। एक टीम की जरूरत पड़ेगी। सुबह ऑफिस से पहले एक या दो घंटे दे सकते हैं। किसी एक जगह पर बच्चों को बुलाकर जीएस से संबंधित गाइडेंस दे सकते हैं। सेंटर फॉर एक्सीलेंस एक बिल्डिंग बनी है। तो जगह की कमी नहीं होगी। बच्चों की रुचि होगी तो जरूर करेंगे।

रुद्रप्रयाग के विकास का भी खाका तैयार
डीएम मंगेश के अनुसार जो भी पहाड़ी जनपद हैं, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में लोग रह रहे हैं। रुद्रप्रयाग को हम लोग देखेंगे तो शिक्षा के लिए प्रायोरिटी बेस पर काम करना होगा। स्वास्थ्य, कनेक्टिविटी, फिर लाइवलीहुड। कई स्कूल हैं जो दूरस्थ हैं। जहां शिक्षक भी नहीं पहुंच पा रहे हैं या लेट से पहुंच हैं। टॉप मोस्ट प्रायोरिटी शिक्षा रहेगी। प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय में सैनिक, राजीव नवोदय विद्यालय, जवाहर नवोदय विद्यालय का फार्म जरूर भरवाया जाय। उसी के आधार पर टीचर का परफार्मेंस मार्क कर सकते हैं। अगर 12वीं में पढ़ रहा है तो इंजीनियरिंग और मेडिकल के फार्म जरूर भरवाए जाएं। फार्म भरेंगे तो कम्पीटिशन का माहौल बनेगा। बच्चों को पता चलेगा कैसे एनडीए, सीडीएस की तैयारी करनी है। इंजीनियरिंग या डॉक्टरी में क्या पूछा जाता है। इसके साथ ही स्वास्थ्य केन्द्रों में चाइल्ड बर्थ से बच्चों के पोषण में ध्यान रखना है। जब से मैंने कार्यभार संभाला है, सड़कों की गुणवत्ता की शिकायत मिल रही है। कई सड़कें स्वीकृत हुए कई साल हो गए हैं। फॉरेस्ट की वजह से सड़कों का निर्माण नहीं हो पा रहा है। कई सड़कों का आधा ही काम हुआ है। डामरीकरण या पहाड़ कटान का काम गुणवत्तापरक नहीं है। इसमें सुधार करने के लिए प्रयास किए जाएंगे। हम लोग अधिक से अधिक शिकायत जनता से ले रहे हैं। इलेक्ट्रोनिक, प्रिंट या सोशल मीडिया से भी जो भी शिकायत आ रही है, उसे गंभीरता से दूर किया जा रहा है।

रोजगार पर भी है प्रशासन का ध्यान
इसके अलावा हम लाइवलीहुड पर काम कर रहे हैं। केदारनाथ यात्रा के लिए चार लाख यात्री आ रहे हैं। हम उनको मार्केट के रूप में देख रहे हैं। कैसे उन्हें बेहतर सुविधा और सेवा दे सकें। अभी रुद्रप्रयाग से केदारनाथ तक कोई ऐसी पहाड़ी वस्तु नहीं दिखती जो आकर्षित करे। हम अगली यात्रा से पहले एक ऐसा मॉडल प्रस्तुत करना चाहते हैं, जिसमें पहाड़ की संस्कृति और परंपरा की झलक दिखाई दे। तीर्थयात्री औ पर्यटक हमारी हस्तशिल्प और रिंगाल के प्रोडक्ट को जानें और उसको खरीदकर ले जाएं। इसमें जो भी ग्रुप काम कर रहे हैं, उन्हें मार्केट मुहैया कराएंगे।

कृषि-डेयरी उत्पादों से रुकेगा पलायन
पलायन आज हर जनपद की समस्या बन गई है। कृषि की उत्पादकता में कमी, बंदर, सूअरों का आतंक, ऐसे कई कारण है, जिस वजह से पलायन हो रहा है। जिला प्रशासन ने एक ग्रुप बनाया है, जिसमें जिलास्तरीय विभागीय अधिकारियों के साथ ही कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक शामिल हैं। हम कोशिश कर रहे हैं कि कृषि को कैसे प्रोफेटेबल बनाया जाय। जिससे कि पलायन पर भी रोक लग सके।

अधिकारी और जनता के बीच तालमेल
हमारा प्रयास शुरू से रहा है कि अधिकारी और जनता के बीच चल रहे गेप को मिनीमाइज कर सकें। क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत या ग्राम पंचायत बैठकों में अधिकारी स्वयं प्रतिभाग करें, वहां से फीडबैक लेकर उसमें कार्रवाई कर रहे हैं। 58 विभाग में से 34 विभाग के फोन खराब चल रहे हैं या फिर उठ नहीं रहे हैं। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि जल्दी फोन ठीक करें। अधिकारियों को मोबाइल पर आम लोगों की कॉल उठाने के निर्देश दिए गए हैं। केन्द्रीय वित्त, राज्य सेक्टर या जिला योजना के काम का भी स्थलीय निरीक्षण किया जाएगा। मौके पर क्या हो रहा है, अधिकारी उसका नक्शा और रिपोर्ट बनाकर भी देंगे। इसके अतिरिक्त जिला योजना के काम फोटो के माध्यम से प्रोजेक्टर के माध्यम से दिखाए। हमारा प्रयास यही है कि टॉप से लेकर बोटम तक जितने भी अधिकारी या कर्मचारी हैं, वह जनता की बात सुने और फीडबैक लें। जनता की शिकायत को इग्नोर न करे और स्वयं इनिशिएटिव लेकर मौके पर जाएं। जनप्रतिनिधि यदि जनता के हित की बात करते हैं तो उस पर अमल किया जाएगा। अनावश्यक दबाव सहन नहीं होगा।

भ्रष्टाचार पर डालेंगे नकेल
डीएम मंगेश घिल्डियाल सरकारी विभागों में कमीशनखोरी से बहुत ही आहत हैं। उनका कहना है कि हमने अपने अधिकारियों को स्पष्ट बोला है कि किसी अधिकारी या कर्मचारी के घर का खर्चा सरकार द्वारा दी गई सेलरी में नहीं चल रहा है, तो वह हमको डायरेक्टली लिखकर दे दें कि मेरी आवश्यकताएं या घर का खर्चा सरकार की सेलरी से नहीं चल रहा है, तो हम उसकी एप्लीकेशन को शासन को प्रेषित करेंगे और कहेंगे कि इनको रिटारयमेंट दिया जाय। कमीशनखोरी या भ्रष्टाचार के प्रकरण सामने आते हैं तो संज्ञान में आने पर कड़ी कार्रवाई होगी।

आपदा प्रबंधन होगा और मजबूत
जनपद पहले से संवेदनशील है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में होने के कारण चाहे लेंड स्लाइड हो, फिर बाढ़ हो, भूकंप की घटना। इससे काफी प्रभावित रहते हैं। हमारी मानसून सीजन को देखते हुए तैयारियां पूरी हैं। हमारे सभी अधिकारी काम कर रहे हैं। मॉक ड्रिल भी किए जा चुके हैं। जनपद मौजूद संसाधनों की सूची तैयार कर दी है। किसी गांव में अगर लोगों को टेंट में रहना पड़ रहा है तो उन्हें राशन उपलब्ध कराने के लिए पहले से ही टेंडर कर चुके हैं। ताकि अनावश्यक देरी न हो। सिंचाई विभाग ने बाढ़ सुरक्षा के सभी कार्य पूरे कर लिए हैं। इसके अतिरिक्त मौसम के फारकास्ट पर अलर्ट जारी कर रहे हैं। जैसे ही भारी बारिश की सूचना मिलती है तो केदारनाथ में तैनात सेक्टर मजिस्ट्रेटों को सूचित कर रहे हैं। सभी संबंधित अधिकारियों को जानकारी दे दी जाती है। सड़कों के बंद होने पर जेसीबी समय पर पहुंच रही है या नहीं। इसका रिस्पांस टाइम देख रहे हैं।

रुद्रप्रयाग के लिए ड्रीम प्रोजेक्ट
महिलाओं के नेचुरल हाइजिन पर काम करेंगे। इसके लिए सीएसआर में बजट भी मिलने वाला है। शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रोजेक्ट पर काम करेंगे। हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की मॉनीटरिंग की जाएगी। उदाहरण के लिए किसी महिला की डिलीवरी की डेट आने वाली है तो आम तौर पर क्या हो है कि एनीमिया या ब्लड प्रेशर के चलते उसकी प्रेग्नेंसी खतरे में होती है। ध्यान नहीं दिया तो डेथ भी हो सकती है। इसलिए हम चाहते हैं कि पांच दस पहले मैसेज फ्लेश हो जाए, ताकि हम उस महिला को शिफ्ट कर दो दिन पहले ही अस्पताल पहुंचा सकें। आजीविका के क्षेत्र में भी काम करेंगे। प्रत्येक ब्लॉक में पांच-पांच गांव चिन्हित करने के निर्देश कृषि विभाग को दिए गए हैं, जहां ज्यादा बंजर खेत हो। ताकि यहां पर एक बेहतर मॉडल दे सके। पहले सर्वे करा रहे हैं। फिर विभागों की स्कीम वहां लागू की जाएगी।

चमोली जिले में बतौर सीडीओ काम किया
स्वच्छ भारत मिशन के ब्रांड एम्बेसडर सचिन तेंदुलकर ने चमोली में सीडीओ रहते हुए मंगेश घिल्डियाल को सम्मानित किया था। चमोली जनपद में बतौर सीडीओ मंगेश घिल्डियाल ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत काम किया। उनके प्रयासों से पूरे जनपद को खुले में शौच से मुक्ति मिली थी। उनका कहना है कि अभी उन्होंने ग्रामीण कस्बों का निरीक्षण किया, जहां बाजार के आसपास कूड़े के ढेर दिखाई दिया। चोपता, तिलवाड़ा, सुमाड़ी, चन्द्रापुरी, मयाली समेत अन्य जितने भी मुख्य स्थान हैं, यहां की सफाई व्यवस्था के लिए आने वाले वित्त वर्ष में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत योजनाएं बनाएंगे। सभी कस्बे यात्रा रूट पर पड़ते हैं। ताकि यात्री भी अच्छा संदेश लेकर जाएं।

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