आज है विश्व दिव्यांग दिवस, मुश्किलें तमाम, फिर भी पाया मुकाम..
उत्तराखंड

आज है विश्व दिव्यांग दिवस, मुश्किलें तमाम, फिर भी पाया मुकाम, बनाई खास पहचान..

आज है विश्व दिव्यांग दिवस, मुश्किलें तमाम, फिर भी पाया मुकाम, बनाई खास पहचान..

उत्तराखंड: हर साल विश्व में 3 दिसंबर का दिन अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन का मकसद है – दिव्यागों के प्रति लोगों के व्यवहार में बदलाव लाना और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरुक करना। हर साल इस दिन दिव्यांगों के विकास, उनके कल्याण के लिए योजनाओं, समाज में उन्हें बराबरी के अवसर मुहैया करने पर गहन विचार विमर्श किया जाता है।

हर वर्ष दुनिया के तमाम देशों में 3 दिसंबर को दिव्यांगों के उत्थान, उनके स्वास्थ्य व सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के उद्देश्य से कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। लेकिन इस बार कोविड-19 के चलते अधिकांश जगहों पर ऑनलाइन कार्यक्रम होंगे।

चुनौतियां कितनी भी हों, मगर जुनून और हौसला है तो नामुमकिन कुछ भी नहीं है। इसका बेमिसाल उदाहरण हैं दिव्यांग प्रतिभाएं, जिन्होंने शारीरिक कष्ट व आर्थिक तंगी के सामने हार नहीं मानी। उन्होंने हर मुश्किल हालात का सामना करते हुए खुद को साबित किया। आज ये प्रतिभाएं किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। दिव्यांग दिवस पर ऐसी ही कई दिव्यांग प्रतिभाओं से आपका परिचय कराते हैं।

 

 

दिव्यांग सागर थयात ने जूनियर वर्ल्ड पैरालंपिक एथलेटिक्स चैंपियनशिप में देश को गोल्ड मेडल दिलाया। सागर थयात ने गोला फेंक में छह अटेम्प्ट में छह बार बढ़त हासिल की। यह प्रतियोगिता स्विट्जरलैंड में हुई थी। उत्तराखंड पैरालंपिक एसोसिएशन के सचिव प्रेम कुमार ने कहा कि सागर थयात आने वाले समय में सीनियर वर्ग में भी देश को मेडल दिला सकते हैं। सागर मूल रूप से बागेश्वर के गरूड़ क्षेत्र के रहने वाले हैं। वह बेहद सामान्य परिवार से हैं।

पैर से दिव्यांग पिंटू सिंह तोमर ने स्वरोजगार के क्षेत्र में खास पहचान बनाई है। शारीरिक कष्ट व आर्थिक तंगी के बावजूद पिंटू ने हार नहीं मानी। उन्होंने सेवला कलां में छोटी सब्जी की दुकान खोलकर खुद की मेहनत से परिवार का गुजारा करना शुरू किया। इसके बाद पिंटू ने मोबाइल शॉप की भी शुरुआत की, जिसमें वह सफल रहे। ब्रह्मपुरी निवासी पिंटू कहते हैं कि वह उन युवाओं को संदेश देना चाहते हैं, जो लॉकडाउन में रोजगार गंवाकर हार मान चुके हैं।

जब भी दिव्यांग प्रतिभाओं की बात आती है तो जहन में सबसे पहले राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान का नाम आता है। यहां की प्रतिभाओं ने शिक्षा से लेकर खेल के क्षेत्र में खास मुकाम हासिल किया है। भले ही इन छात्रों की दृष्टि न हो, लेकिन इनका लक्ष्य पर निशाना अभेद्य है।

 

 

सोवेंद्र सिंह भंडारी : सोवेंद्र सिंह भंडारी अंतरराष्ट्रीय ब्लाइंड फुटबॉलर व क्रिकेटर हैं। वह कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उन्होंने एथलेटिक्स में भी राष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीता है। सोवेंद्र उत्तरकाशी के रहने वाले हैं। उनके पिता किसान हैं।
शिवम सिंह नेगी : 11वीं कक्षा के छात्र शिवम सिंह नेगी भारतीय ब्लाइंड फुटबॉल टीम के स्टार खिलाड़ी हैं। वह एशियन व राष्ट्रीय प्रतियोगिता में कई खिताब जीत चुके हैं। वह 10 किलोमीटर की दौड़ में दूसरा स्थान भी हासिल कर चुके हैं। वह अब पैरा ओलंपिक में देश के लिए मेडल जीतना चाहते हैं।

स्नेहा दुमोगा : स्नेहा एथलीट में उभरता हुआ नाम हैं। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में मेडल जीते हैं। पिछले साल हुए खेल महाकुंभ में भी स्नेहा ने एक गोल्ड व एक सिल्वर मेडल अपने नाम किया था। स्नेहा उत्तरकाशी की रहने वाली हैं।

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