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परंपरा और संस्कृति को जीवित रखने के लिऐ इस कारीगरी को सलाम

दीपक बेंजवाल

” रोटना “ पहाड़ की वो पारंपरिक मिठाई जो आज भी बेटियों की विदाई से जुड़ी परंपराओ की भावुकता बयाँ करती है। आज भी मैत से जब कोई बेटी ससुराल विदा होती है तो मैतीयो की तरफ से उसे कल्यो ( मिठाई ) डल्लियो ( रिंगाल से बनी टोकरिया) में दिया जाता है। जिसे तैयार करने के लिऐ गाँव का हर नागरिक सहयोग देता है। मैत के इस कल्यो में रोटना और अरसा सबसे लोकप्रिय मिठाई है।

रोटना आटे से बनने वाली एक पारंपरिक मिठाई है। इसे बनाने के लिऐ आटे को गुड़ के पानी के साथ गूथा जाता है जिसमें उपलब्धता के अनुसार नारियल, सौप, किशमिश, बदाम को डाल सकते है। इन सबको एक साथ गूथने के बाद हाथ से छोटी छोटी गोलिया बनाकर फोटो में दिखाऐ गये ठप्पे पर रखाकर दबाया जाता है। ठप्पो के दोनो तरफ नक्काशी होती है जो दबाव देने से गोलियो पर आ जाती है। बाद में इन्हे गर्म तेल मे लाल होने तक तला जाता है। और रोटने तैयार हो जाते है जिन्हे महीनेभर तक भी सुरक्षित रखा जा सकता है।

विमल भाई ज्योतिष के जानकार है, किताबो से प्रेम करने वाले विमल भाई अपनी परंपराओ के प्रति भी सजग रहते है, जब भी मौका मिलता है तो उन्हे निभाने के लिऐ तत्पर रहते है। गाँव की बेटी के विवाह के लिऐ रोटने के ठप्पे तैयार कर रहे है। परंपराओ को जीवित रखने उन्हे सहेजने, निभाने की उनके इस लगाव को सलाम। विमल भाई वो सच्चे पहाड़ी है जो आज भी भावुकता, आत्मीयता की अपनी परंपराओ को जीवित रखने के लिऐ प्रयासरत है।परंपरा

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